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🔥 खेरोदा में खतरनाक हटिया का खेल #गवरीनृत्य​ #गवरी​ #हटिया​ #gavrishorts​ #shortsमेवाड़​

मेवाड़ी गवरी 2025

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मेवाड़ी गवरी 2025
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मेवाड़ की गवरी का पूरा विवरण यह रहा: मेवाड़ की गवरी गवरी राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र का प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनाट्य और धार्मिक लोक उत्सव है। यह मुख्य रूप से भील समुदाय द्वारा किया जाता है। गवरी में नृत्य, अभिनय, लोकगीत, संगीत और धार्मिक कथाओं का सुंदर मेल देखने को मिलता है। समय: गवरी सामान्यतः रक्षाबंधन के बाद शुरू होकर लगभग 40 दिनों तक चलती है। इस दौरान कलाकार गाँव-गाँव जाकर प्रस्तुतियाँ देते हैं। मुख्य पात्र: गवरी में भगवान शिव, देवी पार्वती, भस्मासुर, बणिया, राई, मीणा और अन्य लोक-पौराणिक पात्रों की भूमिकाएँ निभाई जाती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में पात्रों और प्रसंगों में कुछ अंतर भी मिलता है। मुख्य कथा: गवरी की अनेक प्रस्तुतियों में शिव-पार्वती और भस्मासुर से जुड़ी पौराणिक कथाओं के साथ स्थानीय लोककथाएँ और सामाजिक प्रसंग शामिल होते हैं। कलाकार अभिनय और नृत्य के माध्यम से इन कथाओं को लोगों तक पहुँचाते हैं। विशेष परंपरा: गवरी में भाग लेने वाले कलाकार कई दिनों तक विशेष नियमों और अनुशासन का पालन करते हैं। गवरी केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आस्था, सामुदायिक एकता और लोक-संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वाद्य यंत्र: ढोल, थाली, मांदल और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों के साथ गवरी का मंचन किया जाता है। महत्व: गवरी मेवाड़ की आदिवासी लोक-संस्कृति की एक अनोखी पहचान है। इसमें धार्मिक विश्वासों के साथ-साथ प्रकृति, समाज, हास्य और स्थानीय जीवन की झलक भी दिखाई देती है।