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मोचीराम/कविता/विस्तृत व्याख्या/धूमिल

साहित्यिक झरोखा

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मोचीराम/कविता/विस्तृत व्याख्या/धूमिल

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साहित्यिक झरोखा
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'मोचीराम' समकालीन हिंदी कविता के सशक्त हस्ताक्षर सुदामा पांडेय 'धूमिल' की एक प्रसिद्ध और विचारोत्तेजक कविता है। इसके माध्यम से कवि ने श्रमजीवी वर्ग की पीड़ा, सामाजिक असमानता और आम आदमी के संघर्ष को बहुत ही बेबाकी और यथार्थ के साथ प्रस्तुत किया है। यह कविता उनके प्रसिद्ध काव्य-संग्रह 'संसद से सड़क तक' (1972) में संकलित है।    • समकालीन हिंदी कविता (B.A. 5th Sem)   #sahityik#jhrokha