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Aav Kanha Mane Dwarka Dekhad | Dwarkadhish Garba Bhajan | Radha Krishna Folk Song | Ghanikhama

Ghanikhama

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Aav Kanha Mane Dwarka Dekhad | Dwarkadhish Garba Bhajan | Radha Krishna Folk Song | Ghanikhama

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आव कान्हा, मने द्वारका देखाड़, ओ कान्हा, मने द्वारका देखाड़। तेरी नगरी में मन मारुं खोवाय, आव कान्हा, मने द्वारका देखाड़। हूँ बोलूँ — श्याम, श्याम, श्याम रे, तू बोल — राधे, राधे नाम रे, ढोल बजे ने ताली पड़े, आज जम्यो रे गरबा धाम रे! आव कान्हा, मने द्वारका देखाड़, ओ कान्हा, मने द्वारका देखाड़! समंदर की लहरों पे चाँदनी झूमे, द्वारका नगरी दीपों से घूमे। केसरिया ध्वज आकाश में लहराए, रणछोड़राय का दरबार सजाए। मने तो तारो रंग लाग्यो रे, मन मारुं मोरली माँ भाग्यो रे, एक वार दर्शन दे दे श्याम, तारा नाम थी धड़के प्राण। आव कान्हा, मने द्वारका देखाड़, ओ कान्हा, मने द्वारका देखाड़। तेरी नगरी में मन मारुं खोवाय, आव कान्हा, मने द्वारका देखाड़। हलो रे हालो, द्वारका हालो, श्यामना रंग में रंगाई जाओ! हलो रे हालो, ताली बजाओ, रणछोड़राय ने आज मनाओ! एक ताली — जय श्री कृष्ण! बीजी ताली — राधे कृष्ण! त्रीजी ताली — रणछोड़राय! बोलो सारे — जय द्वारकाधीश! कान्हा तेरी पीतांबर लहराए, मोर मुकुट मन मोहता जाए। मुरली तेरी जब सुर छेड़े, मन के सारे बंधन तोड़े। तू ही मेरो साथी, तू ही सहारा, तू ही कन्हैया, तू ही हमारा। गोकुल से द्वारका, तेरी कहानी, हर दिल बोले — श्याम दीवानी! मने तो आवे बस एक विचार, द्वारका जाऊँ, करूँ दीदार। तेरे चरणों में माथुं झुकाऊँ, श्याम नाम की धुन में गाऊँ। आव कान्हा, मने द्वारका देखाड़, ओ कान्हा, मने द्वारका देखाड़। दूर नहीं अब मन की आस, ले चल श्याम, अपने पास। आव कान्हा... आव रे कान्हा... मने द्वारका देखाड़! चलो रे मन, द्वारका चलें, जहाँ श्याम के दीप जलें। लहरों में जैसे नाम तेरा, हर साँस में बसे रूप तेरा। पीली धोती, मोर मुकुट प्यारा, द्वारकाधीश तू जग का सहारा। तेरी गली में जो भी आए, प्रेम का रंग लेकर जाए। मने तो श्याम तारा रंग माँ रंगावुं, नाचे-नाचे ने तने मनावुं। ढोल बजे ने मंजीरा बाजे, आज तो द्वारका खूब सजावुं! आव कान्हा! आव रे! मने द्वारका देखाड़! देखाड़ रे! आव कान्हा! आव रे! रणछोड़राय देखाड़! देखाड़ रे! ढोल बजे धा-धिन-धा, ताली पड़े छन-छन-छन, गूँजे सागर, गूँजे धाम, द्वारका बोले — राधे श्याम! आव कान्हा, मने द्वारका देखाड़, ओ कान्हा, मने द्वारका देखाड़। तेरी नगरी में मन मारुं खोवाय, आव कान्हा, मने द्वारका देखाड़! आव कान्हा! मने द्वारका देखाड़! जय श्री कृष्ण! जय द्वारकाधीश!