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आत्मा अपने सत्य से न छूटे | रचित एवं प्रस्तुत: अभिषेक आनंद

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आत्मा अपने सत्य से न छूटे | रचित एवं प्रस्तुत: अभिषेक आनंद

194 просмотра · 1 месяц назад
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“आत्मा अपने सत्य से न छूटे” एक दार्शनिक और आध्यात्मिक हिंदी कविता है, जो जीवन, कर्म, मोह, धन, भोग, क्षमा, ईश्वर और मृत्यु के सत्य पर आत्मचिंतन करने को प्रेरित करती है। हम जीवनभर धन, रिश्तों, इच्छाओं और मोह के पीछे भागते हैं, लेकिन अंत में साथ केवल हमारे कर्म और चेतना जाते हैं। यह कविता एक सवाल छोड़ती है— जब अंतिम साँस तेरा साथ छोड़ेगी, तब तेरे साथ क्या जाएगा? ऐसा जीवन जियो कि किसी का दिल न टूटे, किसी के आँसू का कारण न बनो और जब प्राण तन से छूटे, तो आत्मा अपने सत्य से न छूटे। ✍️ रचित एवं प्रस्तुत: अभिषेक आनंद अगर कविता आपके मन को छुए, तो इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें। 🔑 YouTube Tags hindi poetry, hindi kavita, hindi poem, spiritual poetry, philosophical poetry, hindi spiritual poem, jeevan par kavita, karma par kavita, mrityu par kavita, atma par kavita, aatma apne satya se na chhoote, आत्मा अपने सत्य से न छूटे, जीवन पर कविता, कर्म पर कविता, आध्यात्मिक कविता, दार्शनिक कविता, मृत्यु पर कविता, आत्मा पर कविता, motivational hindi poetry, deep hindi poetry, hindi philosophical poem, abhishek anand poetry #️⃣ Hashtags #आत्माअपनेसत्यसेनछूटे #हिंदीकविता #आध्यात्मिककविता #दार्शनिककविता #कर्म #आत्मा #जीवन #मृत्यु #HindiPoetry #HindiKavita #SpiritualPoetry #PhilosophicalPoetry #AbhishekAnand 🔥 Thumbnail Text आत्मा अपने सत्य से न छूटे छोटे credit में: रचित एवं प्रस्तुत: अभिषेक आनंद