शेषनाग के अवतार बलराम और भगवान श्री कृष्ण का जन्म | Shri Krishna Jeevani
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शेषनाग के अवतार बलराम और भगवान श्री कृष्ण का जन्म | Shri Krishna Jeevani
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एक दिन भगवान शेषनाग भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें इस बार उनके बड़े भाई के रूप में जन्म लेने का अवसर मिले, जिसे वह स्वीकार कर लेते हैं। शेषनाग देवकी के सातवें गर्भ में प्रवेश कर जाते हैं। जिससे कारण देवकी के गर्भ से दिव्य प्रकाश निकलने लगता है, कारागार अलौकिक हो जाता है। कंस को जब इसका पता चलता है, तो वह भयभीत हो उठता है और देवकी को मारने के लिए कारागार आता है, परंतु शेषनाग की शक्ति की चमत्कार से डर कर वह कारागार से भाग जाता है। भगवान विष्णु के आदेश पर देवी योगमाया शेषनाग को देवकी के गर्भ से निकालकर वासुदेव की पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर देती है। इस कारण यह बालक संकर्षण (बलराम) भी कहलाता है। कंस को लगता है कि देवकी का सातवाँ गर्भ गिर गया है, जिस कारण वह आठवें गर्भ के बारे में सोच कर भयभीत रहने लगता है। देवकी के आठवें गर्भ की सूचना मिलने पर जनमानस को आशा की किरण दिखाई देने लगती है। देवकी के आठवें गर्भ में भगवान विष्णु के प्रवेश करने पर ब्रह्मांड के देवता पुष्पवर्षा करके उनका स्वागत करते हैं। कारागार में यह चमत्कार देखकर कंस सशंकित हो उठता है और पहरे सख्त करवा देता है। भगवान श्रीकृष्ण योगमाया से कहते हैं कि वे यशोदा के गर्भ से जन्म लें और उनकी बहन कहलाएँ। योगमाया यशोदा के गर्भ में प्रवेश कर जाती हैं। वही दूसरी तरफ कंस हर जगह विष्णु को देखने लगता है, उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है। नारदजी जब श्रीकृष्ण से पूछते हैं कि कंस को भी उनका ध्यान करने से मोक्ष मिलेगा तो पापी और भक्त में क्या अंतर, तो श्रीकृष्ण बताते हैं कि हर कोई उन्हें अपने भाव के अनुसार प्राप्त करता है। अंततः भाद्रपद की अष्टमी की रात, श्रीकृष्ण का जन्म होता है। योगमाया की माया से कारागार के द्वार खुल जाते है, वसुदेव देवी के निर्देशानुसार अपने नवजात पुत्र को रात्रि में ही विकराल बहती यमुना पार गोकुल में यशोदा के छोड़ आते है और उनकी पुत्री को लेकर लौट आते हैं। कंस उस नवजात कन्या को मारने के लिए आता है, परंतु वह योगमाया का रूप लेकर आकाश में विलुप्त होने से पूर्व कंस को बताती है कि उसका वध करने वाला जन्म ले चुका है।
सम्पूर्ण जगत में भगवान विष्णु के आठवें अवतार एवं सोलह कलाओं के स्वामी भगवान श्री कृष्ण काजीवन धर्म, भक्ति, प्रेम, और नीति का अद्भुत संगम है। वसुदेव और देवकी के पुत्र के रूप में कारागार में जन्म लेकर गोकुल की गलियों में यशोदा और नंदबाबा के यहाँ पलने वाले, अपनी लीलाओं, जैसे पूतना वध, माखन चोरी, राधा के संग प्रेम, गोपियों के साथ रासलीला और कालिया नाग के दमन के लिए प्रसिद्ध श्री कृष्ण ने युवावस्था में मथुरा कंस का वध करके जनमानस को उसके अत्याचार से मुक्त कराया एवं स्वयं के लिए द्वारका नगरी स्थापना भी की। उनका जीवन केवल लीलाओं तक सीमित नहीं था। उन्होंने समाज को धर्म और कर्म का गूढ़ संदेश देने के लिए महाभारत के युद्ध में पांडवों का मार्गदर्शन किया और अर्जुन के सारथी बनकर उसे "श्रीमद्भगवद्गीता" का उपदेश दिया, जो आज भी जीवन की समस्याओं का समाधान बताने वाला महान ग्रंथ माना जाता है। श्री कृष्ण का जीवन प्रेम, त्याग, और नीति का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। आपका प्रिय चैनल "तिलक" श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ा यह विशेष संस्करण "श्री कृष्ण जीवनी" आपके समक्ष प्रस्तुत है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ी कथाओं का संकलन किया गया है। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिए और तिलक से जुड़े रहिए।
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