मोह के जाल से छुड़ा लो प्रभु | कर्मों से मुझे बचा लो प्रभु 🙏 | Jain Bhajan | जैन गीत माला#jain#
Sharda Dhiliwal
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मोह के जाल से छुड़ा लो प्रभु | कर्मों से मुझे बचा लो प्रभु 🙏 | Jain Bhajan | जैन गीत माला#jain#
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Sharda Dhiliwal
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मोह के जाल से छुड़ा लो प्रभु,
कर्मों से मुझे बचा लो प्रभु।
भव-सागर में डूब रहा हूँ,
अपना हाथ बढ़ा लो प्रभु।
झूठी दुनिया, झूठे रिश्ते,
सबमें मन उलझा जाता है,
क्षणभर की इस जीवन-यात्रा में,
मन तेरा नाम भुलाता है।
मोह के जाल से छुड़ा लो प्रभु,
कर्मों से मुझे बचा लो प्रभु।
क्रोध, मान और माया घेरे,
लोभ मुझे भरमाता है,
सच्ची राह दिखा दो स्वामी,
मन फिर तुझमें लग जाता है।
तेरी शरण में आकर प्रभु,
मन को निर्मल कर लूँ मैं,
जन्म-जन्म के बंधन काटूँ,
आत्मा को उज्ज्वल कर लूँ मैं।
मिच्छामि दुक्कडम् भाव जगाकर,
सबसे क्षमा मैं माँगूँ प्रभु,
अहिंसा और संयम की राह पर,
हर पल आगे बढ़ूँ प्रभु।
मोह के जाल से छुड़ा लो प्रभु,
कर्मों से मुझे बचा लो प्रभु।
भव-सागर में डूब रहा हूँ,
अपना हाथ बढ़ा लो प्रभु…