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Jhariya Mahadev चट्टान के नीचे अद्भुत शिवलिंग और नदी का सुंदर झरना 🌊🔱

Suraj VIogs 7

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Jhariya Mahadev चट्टान के नीचे अद्भुत शिवलिंग और नदी का सुंदर झरना 🌊🔱

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#chittorgarh #bhilwara #jhariyamahadev #HarHarMahadev #bholenath #shivling #jalabhishek #omnamahshivaya #mahadevstatus #devokedevmahadev #shivbhakt    • Chattan Ke Andar Adbhut Mahadev Mandir 🔱 #...      • गुप्तेश्वर महादेव मंदिर Pahadon Ke Andar H...   यह पवित्र धाम राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में पारसोली–महेसरा क्षेत्र के घने जंगलों और विंध्याचल की पथरीली पहाड़ियों के बीच स्थित है। यह स्थान पारसोली से लगभग 15 किमी, चित्तौड़गढ़ शहर से करीब 41-42 किमी और भीलवाड़ा से लगभग 61 किमी की दूरी पर है। मंदिर की मुख्य विशेषताएँ चट्टानों के अंदर गुफा मंदिर: मंदिर किसी आम कंक्रीट भवन की तरह नहीं है, बल्कि विशालकाय प्राकृतिक चट्टानों और गुफाओं के नीचे स्थित है। प्राकृतिक अविरल जलाभिषेक: चट्टानों के बीच से सालभर एक मीठे पानी की प्राकृतिक जलधारा (झरना) रिसती रहती है, जो सीधे अंदर स्थापित शिवलिंग पर गिरती है। इसी निरंतर "झिरने" वाले पानी के कारण इसे 'झरिया महादेव' कहा जाता है। स्वयंभू शिवलिंग: यहाँ स्थापित शिवलिंग को प्राकृतिक और स्वयंभू माना जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि यहाँ प्रकृति स्वयं महादेव का 24 घंटे अभिषेक करती है। कुंड और प्राकृतिक झरना: मंदिर परिसर के ठीक बाहर बरसात के मौसम में एक सुंदर झरना और नीचे गहरा जलकुंड बनता है, जहाँ हरी-भरी वादियों के बीच पानी बहता है। आस्था और धार्मिक महत्व सावन के महीने, हर सोमवार और महाशिवरात्रि पर यहाँ दर्शनार्थियों और कांवड़ियों का तांता लगा रहता है। घूमने के लिए सबसे अच्छा समय मानसून (जुलाई से सितंबर): इस दौरान आसपास के पहाड़ हरे-भरे हो जाते हैं और झरना अपने पूरे वेग से बहता है, जिससे यहाँ का दृश्य अत्यंत मनमोहक लगता है। सर्दियों का मौसम (अक्टूबर से फरवरी): ट्रेकिंग और शांत वातावरण में दर्शन के लिए यह समय भी काफी अनुकूल रहता है। यात्रियों के लिए जरूरी सुझाव मंदिर तक पहुँचने के लिए सीढ़ियों और थोड़े पथरीले रास्तों से उतरना पड़ता है, इसलिए मजबूत ग्रिप वाले जूते पहनें। बारिश के दिनों में चट्टानों पर काई जमने से फिसलन बढ़ जाती है, इसलिए कुंड और झरने के गहरे पानी के पास सावधानी रखें। जंगली और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण खाने-पीने का जरूरी सामान साथ रखें और शाम ढलने से पहले मुख्य सड़क की तरफ लौट आएँ