"अद्वैत vs कॉग्निटिव साइंस – 'मैं कौन हूँ?' का न्यूरोसाइंटिफिक जवाब | शंकराचार्य"
The Spiritual Talk 108
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"अद्वैत vs कॉग्निटिव साइंस – 'मैं कौन हूँ?' का न्यूरोसाइंटिफिक जवाब | शंकराचार्य"
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“मैं कौन हूँ?” यह प्रश्न केवल दर्शन का नहीं, बल्कि मानव चेतना के सबसे गहरे प्रश्नों में से एक है। आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत में अहंकार, साक्षी और आत्मज्ञान की चर्चा मिलती है, जबकि आधुनिक Cognitive Science और Neuroscience यह समझने का प्रयास करते हैं कि हमारे भीतर “मैं” की अनुभूति कैसे बनती है। इस वीडियो में हम Default Mode Network (DMN), self-referential thinking, meditation, attention, साक्षी भाव और अद्वैत वेदांत के बीच संबंध को समझने की कोशिश करेंगे। क्या ध्यान के दौरान “मैं” की कहानी कमजोर पड़ सकती है? क्या DMN और अहंकार के बीच कोई दार्शनिक समानता है? क्या ध्यान में आने वाले अनुभव को तुरीय कहा जा सकता है? और सबसे महत्वपूर्ण — यदि विचार, स्मृतियाँ, भावनाएँ और शरीर सभी अनुभव के विषय हैं, तो वास्तविक “मैं” कौन है? इस वीडियो में विज्ञान और अद्वैत को एक ही चीज सिद्ध करने के बजाय, दोनों दृष्टिकोणों के बीच मौजूद समानताओं और महत्वपूर्ण अंतर को समझेंगे। यह यात्रा आपको अपने ही मन को देखने और उस मूल प्रश्न तक पहुँचने के लिए आमंत्रित करती है — “मैं कौन हूँ?”
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