नवरात्रि अष्टम दिन: रावण का सामना करने से पहले राम ने देवी की पूजा क्यों की? | नवरात्रि विशेष
धर्म दृष्टिकोण ( Dharma Drishtikona)
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नवरात्रि अष्टम दिन: रावण का सामना करने से पहले राम ने देवी की पूजा क्यों की? | नवरात्रि विशेष
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रावण के विरुद्ध अपने उद्देश्य को पूर्ण करने से पहले श्रीराम को देवी की पूजा करने की आवश्यकता क्यों होगी?
श्रीमद् देवीभागवत इसका एक उल्लेखनीय उत्तर देता है।
राम के वनवास के दौरान, सीता के अपहरण के बाद, ऋषि नारद राम को आश्विन मास में नवरात्र-व्रत करने और निर्धारित विधि के अनुसार देवी की पूजा करने का निर्देश देते हैं।
किन्तु राम एक अधिक गहरा प्रश्न पूछते हैं:
यह देवी कौन हैं?
उनकी शक्ति क्या है?
और राम को उनकी पूजा क्यों करनी चाहिए?
नारद उनकी पहचान नित्य आद्य शक्ति के रूप में करते हैं—वह शक्ति, जिसके द्वारा ब्रह्मा सृष्टि करते हैं, विष्णु पालन करते हैं और रुद्र संहार करते हैं। वे कहते हैं कि उनकी शक्ति के बिना कोई भी स्पन्दन करने तक में समर्थ नहीं हो सकता।
राम नारद के निर्देश का पालन करते हैं।
नारद इस अनुष्ठान के आचार्य बनते हैं।
राम नवरात्रि के दौरान उपवास करते हैं और देवी की पूजा करते हैं।
फिर अष्टमी की मध्यरात्रि में देवी सिंह पर आरूढ़ होकर उनके सामने प्रकट होती हैं।
वे राम से कहती हैं कि वे उनके व्रत से प्रसन्न हैं, रावण के विरुद्ध उनके दिव्य उद्देश्य के विषय में बोलती हैं और बताती हैं कि उनकी सहायता करने वाले वानर उनकी शक्ति से युक्त हैं।
राम नवरात्र-व्रत पूर्ण करते हैं और दशमी को विजया-पूजा करते हैं।
इसके बाद ही वे समुद्र और उस संघर्ष की ओर आगे बढ़ते हैं, जिसका परिणाम अन्ततः रावण के विनाश में होगा।
इसकी शिक्षा यह नहीं है कि राम किसी प्रकार राम नहीं रहते।
श्रीमद् देवीभागवत इससे कहीं अधिक विशिष्ट तात्त्विक दावा करता है:
वह राम के अवतारिक उद्देश्य को भी शक्ति के माध्यम से संचालित होते हुए प्रस्तुत करता है।
और यही हमें हमारी नौ दिनों की यात्रा के अन्तिम प्रश्न तक ले आता है:
वास्तव में नवरात्रि किसलिए है?
इसका उत्तर लेकर हम नौवें दिन इस शृंखला का समापन करेंगे।
विशेष रूप से श्रीमद् देवीभागवत पर आधारित।
प्रमुख स्रोत: श्रीमद् देवीभागवत, तृतीय स्कन्ध, अध्याय ३०, विशेष रूप से श्लोक १८–३० और ३८–६१।
सहायक स्रोत: तृतीय स्कन्ध, अध्याय २७, विशेष रूप से श्लोक ४९–५३।
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