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BHUMI BHUMIYAL || BALAN-VILL-CHAMOLI || PART 3

Prakash bisht

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BHUMI BHUMIYAL || BALAN-VILL-CHAMOLI || PART 3

163 просмотра · 1 дн. назад
Prakash bisht
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🙏 जय भूमि भूमियाल देवता 🙏 🏔️ Bhumi Bhumiyal Devta | Balan Village, Chamoli, Uttarakhand | Part 1 देवभूमि उत्तराखंड के चमोली जिले के बालाण गाँव की आस्था, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी इस खास वीडियो में आपका स्वागत है। इस वीडियो में भूमि भूमियाल देवता से जुड़ी धार्मिक आस्था, उत्तराखंड की लोक संस्कृति और पहाड़ी परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। 🌸 Video Highlights: ✅ भूमि भूमियाल देवता (Bhumi Bhumiyal Devta) ✅ बालाण गाँव, चमोली, उत्तराखंड ✅ उत्तराखंड की धार्मिक मान्यताएँ ✅ पहाड़ी संस्कृति और परंपराएँ ✅ देवभूमि उत्तराखंड की विरासत 🙏 अगर आपको उत्तराखंड की संस्कृति, देवी-देवताओं और पहाड़ी परंपराओं से प्यार है, तो वीडियो को Like करें, Share करें और Channel को Subscribe करना न भूलें। 🎥 Watch Video:    • BHUMI BHUMIYAL || BALAN-VILL-CHAMOLI || PA...   🔔 Subscribe for more videos about Uttarakhand culture, traditions and village life. 🙏 जय भूमियाल देवता! ❤️ जय देवभूमि उत्तराखंड! #BhumiBhumiyal #BhumiyalDevta #Chamoli #Uttarakhand #BalanVillage #DevbhoomiUttarakhand #UttarakhandCulture #pahadiculture जय भूमिराज(भूमियाल) देवता भूमि के देवता होते हैं। पहाड़ क्षेत्र में खेती बाड़ी प्रत्येक गांवों में होती है। इन्हें भूमि या फसलों को जंगली जानवरों और प्राकृतिक आपदाओं से बचाने व रक्षा करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। अर्थात भूमि या क्षेत्र की रक्षा करने वाले भूमियाल या क्षेत्रपाल देव हुये । उत्तराखण्ड में भूमिया देवता के मंदिर प्रायः हर गाँव में हुआ करते हैं, भूमिया देवता को भूमि का रक्षक देवता माना जाता है, इसी वजह से इन्हें क्षेत्रपाल भी कहा जाता है ! खेतों में बुवाई किए जाने से पहले पहाड़ी किसान बीज के कुछ दाने भूमिया देवता के मंदिर में बिखेर देते हैं, विभिन्न पर्व-उत्सवों के अलावा रबी व खरीफ की फसल पक जाने के बाद भी भूमिया देवता की पूजा अवश्य की जाती है। फसल पक जाने पर फसल की पहली बालियाँ भूमिया देवता को ही चढ़ाई जाती हैं और फसल से तैयार पकवान भी ! सभी मौकों पर पूरे गाँव द्वारा सामूहिक रूप से भूमिया देवता का पूजन किया जाता है। मैदानी इलाकों में इन्हें भूमसेन देवता के नाम से भी जाना जाता है। भूमिया देवता की पूजा एक प्राकृतिक लिंग के रूप में की जाती है। भूमिया देवता के जागर भी आयोजित किये जाते हैं ! पर्वतीय अंचल के अलावा तराई की थारू व बूक्सा जनजातियों में भी भूमिया देवता की बहुत ज्यादा मान्यता है, इन जनजातियों में इन्हें भूमिया व भूमसेन दोनों ही नामों से जाना जाता है। थारू जनजाति द्वारा इनके मंदिर की स्थापना पीपल या नीम के पेड़ के तले ऊंचा चबूतरा बनाकर की जाती है। बूक्सा जनजाति भूमसेन मंदिर की स्थापना गाँव के मुखिया के घर के सामने नीम या किसी अन्य पुष्पित वृक्ष के तले करती है, मुखिया द्वारा रोज इनकी पूजा की जाती है हर त्यौहार और फसलचक्र पर देवता को भेंट भी चढ़ाई जाती है। Who is Bhumiyal Devta? In almost every village of Uttarakhand, there is a small temple or a sacred platform called than. This is where Bhumiyal Devta is worshipped. Villagers believe that Bhumiyal is always watching over them. He protects the crops from wild animals, saves the village from natural calamities, and keeps diseases away. In many regions he is also called Bhumsen. Bhumiyal Devta is considered very kind. Unlike some other fierce deities, he does not trouble anyone. Instead, his main role is to guard the boundaries of the village and maintain harmony among the people. That is why he is often called the protector of the land and the village