सदा न संग सहेलियां। समय सदा एक जैसा नहीं रहता है।
PRABHAT SHRI
0:00 / 0:00
सदा न संग सहेलियां। समय सदा एक जैसा नहीं रहता है।
4 просмотра · 22 часа назад
PRABHAT SHRI
245 подписчиков
4 просмотра · 22 часа назад
सदा न संग सहेलियाँ, सदा न राजा देश।
सदा न जुग में जीवणा, सदा न काला केश।।
सदा न फूलै केतकी, सदा न सावन होय।
सदा न विपदा रह सके, सदा न सुख भी होय।।
सदा न मौज बसन्त री, सदा न ग्रीष्म भाण।
सदा न जोवन थिर रहे, सदा न संपत माण।।
सदा न काहू की रही, गल प्रीतम की बांह।
ढलते ढलते ढल गई, तरवर की सी छाँह।।