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कार्तिक के अंतिम 5 दिन 5 काम करने वाले को 100 जन्मों का पुण्य देकर जायेंगे || शास्त्र प्रमाण सहित

Richa Divine Paths

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कार्तिक के अंतिम 5 दिन 5 काम करने वाले को 100 जन्मों का पुण्य देकर जायेंगे || शास्त्र प्रमाण सहित

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शास्त्र कह रहा है सुनिएगा कि व्रत नाम सर्वेशा मेकम जन्मुगम फलम कार्तिकेतु व्रतसक्तम फलम जन्म शतानुगम शास्त्र कहता है कि समस्त व्रतों का फल केवल एक जन्म तक रहता है लेकिन कार्तिक के महीने में जो व्रत किया जाता है जो नियम धारण किए जाते कोई विशेष कार्य किया जाता है वह 100 जन्मों तक हमारे संग रहता है। इसलिए क्यों चूकना? कार्तिक के पांच दिन अर्थात कि 1 नवंबर से लेकर 5 नवंबर पर्यंत तक यह कार्तिक के पांच दिन हैं। 1 नवंबर को शनिवार है और इस दिन हर प्रबोधिनी एकादशी रहेगी जब भगवान जागते हैंऔर 5 नवंबर को कार्तिक की पूर्णिमा रहेगी और 1 नवंबर से लेकर 5 नवंबर तक भीष्म पंचक भी चलेंगे। अब ऐसे में यदि आप इन पांच पावन पवित्र दिनों में जिसके अंतर्गत एकादशी आती है जिसके अंतर्गत प्रदोष व्रत आएगा जिसके अंतर्गत वैुंठ चतुर्दशी आएगी जिसके अंतर्गत आपकीकार्तिक पूर्णिमा आएगी जिसके अंतर्गत आपके भीष्म पंचक आएंगे तो ऐसे पावन पवित्र पांच दिनों में आप इन पांच कार्य करके अपने जीवन को सफल कीजिएगा 1.प्रातः स्नान कीजिए। जल्दी स्नान कीजिए और स्नान करके दो काम दो सेवाएं जरूर करनी है। एक सूर्य भगवान को जल देने की सेवा और दूसरा भगवान की रात्रि की सेवा। रात्रि की सेवा को कहते हैं हरि जागरण। रात्रि के समय आप भगवान के नाम का जप कीजिए। रात्रि जागरण का अर्थ है भगवान के नाम का भजन चिंतन कीजिए। जितनी देर तक आपसे रात्रि जागरण हो सके आप रात्रि जागरण करने का प्रयास कीजिएगा। 2. तुलसी सेवनम। क्यों नहीं इस कार्तिक के महीने में तुलसी की सेवा की जाए। अपने घर में जो तुलसी मैया है तुलसी माता की सेवा करने वाले बनो। दीप दान करने वालों बनो। इन पांच दिनों में सुबह और शाम दोनों समय माता तुलसी में दीप दान करो। खूब माता तुलसी को प्रणाम करो क्योंकि इन्हीं पांच दिनों में तुलसी विवाह भी आता है और तुलसी विवाह करने का अधिकार भी उन्हीं को ही है जिन्होंने साल भर तुलसी माता की सेवा करी हो। तुलसी माता को प्रणाम कीजिए।तीन बार तुलसी में जल चढ़ाइए। चार बार तुलसी माता की परिक्रमा कीजिए और सुबह और शाम के समय दोनों टाइम आपने दीपदान करना चाहिए। 3. कार्तिक के महीने में सबसे बड़ी जो विधि बताई गई है वो एक ही विधि है वह है दीपदान। जिसने कार्तिक के महीने में दीपदान कर लिया मानो उन्होंने सब कुछ प्राप्त कर लिया। इसलिए कार्तिक के महीने में सर्वोपरि जो फल प्राप्त होता है वह दीपदान से प्राप्त होता है। शास्त्र कहता है कि मंत्रहीनम क्रियाहीनम शौचहीनम जनार्दनम सर्वम संपूर्णता याति कार्तिके दीपदानता भगवान कहते मुझे फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने विद्वान हो आपने कितनी विधि से मेरे कार्तिक के महीने का नियम धारण किया है। आपने कौन सा मंत्र शुद्ध पढ़ा कौन सा स्त्रोत्र शुद्ध पढ़ा मुझे कोई इसका लेना देना नहीं। मुझे तो मात्र केवल संपूर्णता यातिम कार्तिके दीपदानता केवल कार्तिक के महीने में हमने कहीं पर भी कोई त्रुटि करी हो तो केवल दीप दान करने से हमें फल प्राप्त हो जाता है। तो इन पांच दिनों में आप रोज सुबह शाम दीप दान कीजिए। कहां-कहां कीजिए? भगवान शिव के मंदिर में दीप दान कीजिए। बेल वृक्ष में दीप दान कीजिए। केले के पेड़ में दीप दान कीजिए। पीपल के पेड़ में दीप दान कीजिए। आंवला के वृक्ष में दीप दान कीजिए। तुलसी माता जो भी पावन पवित्र पुण्यकारी वट वृक्ष है वहां पर आप दीप दान कीजिए। आप किसी भी मार्ग पर दीप दान कीजिए। जो जिस पावन पवित्र नदी के किनारे वास करता दीपदान कार्तिक इन पांच दिनों में एक बार जरूर यदि अवसर मिले करके आइए।क्योंकि कार्तिक का पूरा महत्व केवल दीपदान पर आधारित रहता है 4.साथ ही साथ कार्तिक के महीने का अंतिम जो समय रहता है वह रहता है उद्यापन का। जब कार्तिक का समय नीचे उतरे तो आप कार्तिक की पूर्णिमा के दिन ब्राह्मणों को बुलावे और अपने घर में सत्यनारायण भगवान की कथा करें। सत्यदेव की कथा को रखें। ब्राह्मणों को जमावें, बेटियों को जमाव, दामाद, जमाई यदि भांजे हो तो उनको भी जमाना चाहिए और भोजन इत्यादि जमाकर उनको दान दक्षिणा देकर अपने संपूर्ण कार्तिक के फल को प्राप्त करना चाहिए। ब्राह्मण चरण यदि कार्तिक मास में द्वार में पड़ जाए। ब्राह्मण को दक्षिणा, दामाद को दक्षिणा, भांजे को दक्षिणा, कन्या जिनका विवाह हो गया उनको दक्षिणा, छोटी कन्याओं को यदि आपने दान पुण्य कर दिया तो वह आपका जो कार्तिक मास है ना वह सफल हो जाता है 5. अपने घर में यदि शालिग्राम भगवान अभी नहीं आ पा रहे हैं तो आप भगवान की मूर्ति में ही इस विशेष वस्तु को अर्पण करें। सुनिए शास्त्र क्या कह रहा है कि बिल पत्रेण ये देवं कार्तिकेधनो पूजयंती महाभक्त मुक्त तेशा मयोदिता क्या सुंदर बात कही है कि कार्तिक के महीने में एक भी कार्तिक के महीने में एक भी बेल का पत्ता यदि शालिग्राम भगवान के ऊपर चढ़ जाए भगवान विष्णु जी के ऊपर चढ़ जाए तो पूजयंती महाभक्त वह भक्त जो पूजन कर रहा है वह समस्त दोषों से मुक्त हो जाता है 6. आपके घर में यदि तुलसी की काष्ट पड़ी है। तुलसी काष्ट समझते हैं ना सूखी हुई तुलसी की जो लकड़ी होती है। तुलसी जो काष्ट होती है उसे फेंकना नहीं चाहिए। उनसे दो काम करने चाहिए पहला होमंम कुरवंत ये विप्रास तुलसी काष्टिनम सिकते सिकते तिलेवापी अग्निष्टोम फलम लभित शास्त्र कहता है कि यदि जो कार्तिक के महीने में या आगे पीछे भी लेकिन कार्तिक के महीने की विशेष यदि आप तुलसी की सूखी हुई लकड़ी से हवन कर लें और ओम नमो भगवते वासुदेवाय यह भगवान वासुदेव का मंत्र है। मंत्र के माध्यम से यदि आप घृत की आहुति जलती हुई तुलसी के काष्ट में अर्पित कर दें तो आपको पग पग पर पग पग पर आपको अश्वमेध यज्ञ फल की प्राप्ति इतना श्रेष्ठ यज्ञ है तुलसी के काष्ट के द्वारा #kartikmaas #kartikmonth #kartikmahina #kartikmasa #kartiksnan2025 #kartikpuja #KartikBhakti #kartikmahatmya #KartikDevotion #KartikDeepdaan