72th BPSC , BPSC TRE -4.0 के लिए पूर्वावलोकन संपूर्ण भारत का भूगोल New Eddition 2026 Part -4
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यह विस्तृत चर्चा BPSC, TRE 4.0, बिहार शिक्षक भर्ती, SSC, रेलवे, UPSC, राज्य PCS, CTET, STET, पुलिस, दरोगा तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है।
1. भारत की भौगोलिक स्थिति
भारत एशिया महाद्वीप के दक्षिणी भाग में स्थित है। भारत का अधिकांश भू-भाग उत्तरी और पूर्वी गोलार्ध में आता है। भारत की भौगोलिक स्थिति उसे एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच समुद्री संपर्क की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है।
भारत के पश्चिम में अरब सागर, पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण में हिंद महासागर स्थित है। भारतीय प्रायद्वीप हिंद महासागर में आगे की ओर निकला हुआ है। यही कारण है कि हिंद महासागर के समुद्री मार्गों में भारत की भौगोलिक स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत का मुख्य भू-भाग लगभग 8°4' उत्तरी अक्षांश से 37°6' उत्तरी अक्षांश तथा 68°7' पूर्वी देशांतर से 97°25' पूर्वी देशांतर तक विस्तृत है। भारत की अक्षांशीय स्थिति के कारण देश के विभिन्न भागों में जलवायु की विविधता दिखाई देती है।
कर्क रेखा भारत के मध्य भाग से होकर गुजरती है। यह भारत की जलवायु और सूर्य की किरणों के वितरण को समझने में महत्वपूर्ण है।
भारत की मानक मध्याह्न रेखा 82°30' पूर्वी देशांतर मानी जाती है। इसी के आधार पर भारतीय मानक समय निर्धारित किया जाता है।
2. भारत का क्षेत्रफल और आकार
भारत का कुल क्षेत्रफल लगभग 32.87 लाख वर्ग किलोमीटर है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व के बड़े देशों में शामिल है।
भारत का आकार लगभग त्रिकोणीय या प्रायद्वीपीय स्वरूप का दिखाई देता है। उत्तर में विशाल पर्वतीय क्षेत्र तथा दक्षिण में प्रायद्वीपीय पठार और समुद्र से घिरा हुआ क्षेत्र भारत की भौगोलिक पहचान को विशेष बनाता है।
भारत का उत्तर-दक्षिण विस्तार लगभग 3214 किलोमीटर तथा पूर्व-पश्चिम विस्तार लगभग 2933 किलोमीटर है। विशाल विस्तार के कारण देश के अलग-अलग भागों में तापमान, वर्षा, मिट्टी, वनस्पति और कृषि में व्यापक अंतर दिखाई देता है।
भारत की लंबी समुद्री तटरेखा समुद्री व्यापार, मत्स्य पालन, बंदरगाह, पर्यटन तथा सामरिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है।
3. भारत की स्थल एवं समुद्री सीमाएँ
भारत की स्थल सीमा कई देशों से जुड़ी हुई है। उत्तर-पश्चिम में पाकिस्तान और अफगानिस्तान, उत्तर में चीन, नेपाल और भूटान तथा पूर्व में बांग्लादेश और म्यांमार स्थित हैं।
भारत के दक्षिण में समुद्र होने के कारण श्रीलंका और मालदीव जैसे पड़ोसी देशों के साथ भारत के समुद्री संबंध हैं।
भारत की सीमाएँ केवल राजनीतिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि भूगोल की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हिमालय भारत को उत्तरी दिशा से प्राकृतिक अवरोध प्रदान करता है, जबकि समुद्र दक्षिणी सीमा की विशेषता है।
4. भारत के प्रमुख भौतिक विभाग
भारत की भौतिक संरचना को मुख्यतः छह भागों में बाँटा जाता है—
उत्तरी और उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र
उत्तरी विशाल मैदान
प्रायद्वीपीय पठार
भारतीय मरुस्थल
तटीय मैदान
द्वीप समूह
इन सभी प्रदेशों की अपनी अलग भौगोलिक विशेषताएँ हैं।
5. हिमालय पर्वत
हिमालय भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित विशाल पर्वत प्रणाली है। हिमालय का निर्माण भूगर्भीय प्रक्रियाओं से हुआ है और यह विश्व की सबसे महत्वपूर्ण पर्वत प्रणालियों में से एक है।
हिमालय की भारत के लिए अनेक भूमिकाएँ हैं। यह मध्य एशिया की ठंडी हवाओं को भारत में सीधे प्रवेश करने से रोकने में मदद करता है। हिमालय से निकलने वाली अनेक नदियाँ पूरे वर्ष जल प्रदान करती हैं। हिमालयी क्षेत्र में वन, जैव विविधता और पर्यटन की भी बड़ी संभावनाएँ हैं।
हिमालय को सामान्यतः तीन प्रमुख समानांतर श्रेणियों में बाँटा जाता है—
महान हिमालय या हिमाद्रि
यह हिमालय की सबसे ऊँची और उत्तरी श्रेणी है। यहाँ अनेक ऊँची पर्वत चोटियाँ पाई जाती हैं। हिमालय के हिमाच्छादित क्षेत्रों से अनेक नदियों को जल प्राप्त होता है।
लघु हिमालय या हिमाचल
महान हिमालय के दक्षिण में स्थित लघु हिमालय में अनेक पर्वतीय घाटियाँ और पर्यटन क्षेत्र पाए जाते हैं।
शिवालिक
शिवालिक हिमालय की सबसे दक्षिणी श्रेणी है। इसकी ऊँचाई अन्य हिमालयी श्रेणियों की तुलना में कम है।
6. उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र
भारत के उत्तर-पूर्व में हिमालय की कई शाखाएँ दिखाई देती हैं। इनमें नागा, मिजो, गारो, खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ महत्वपूर्ण हैं।
मेघालय का पठारी क्षेत्र भी भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उत्तर-पूर्व भारत में अधिक वर्षा, घने वन और जैव विविधता पाई जाती है।
7. उत्तरी विशाल मैदान
हिमालय से निकलने वाली नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेपों से भारत का विशाल उत्तरी मैदान बना है। यह मैदान अत्यंत उपजाऊ है और भारत की कृषि व्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
उत्तरी मैदान को सामान्यतः तीन प्रमुख भागों में समझा जाता है—
पंजाब का मैदान
गंगा का मैदान
ब्रह्मपुत्र का मैदान
इस मैदान में अनेक बड़ी नदियाँ बहती हैं। उपजाऊ मिट्टी, पर्याप्त जल और अपेक्षाकृत समतल भूमि के कारण यहाँ घनी आबादी और गहन कृषि पाई जाती है।
8. भाबर और तराई
हिमालय की तलहटी में भाबर क्षेत्र पाया जाता है। यहाँ नदियाँ कंकड़-पत्थरों से बने निक्षेपों के बीच भूमिगत हो जाती हैं।
भाबर के दक्षिण में तराई क्षेत्र मिलता है। यहाँ नदियाँ पुनः सतह पर आ जाती हैं। इस कारण तराई क्षेत्र में भूमि अधिक नम और कई स्थानों पर दलदली होती है।
तराई क्षेत्र प्राकृतिक वनस्पति और वन्यजीवों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा है।
9. बांगर और खादर
उत्तरी मैदान की जलोढ़ मिट्टी को पुरानी और नई जलोढ़ मिट्टी के आधार पर समझा जाता है।
बांगर पुरानी जलोढ़ मिट्टी का क्षेत्र है।
खादर नई जलोढ़ मिट्टी से बना क्षेत्र है। नदियों द्वारा समय-समय पर लाई गई नई मिट्टी के कारण खादर क्षेत्र सामान्यतः अत्यंत उपजाऊ होता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में बांगर और खादर के बीच अंतर अक्सर पूछा जाता है।
10. प्रायद्वीपीय पठार