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श्री नन्दा देवी बड़ी जात 2026

nimsgarhwali

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श्री नन्दा देवी बड़ी जात 2026

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मां नंदा की विदाई: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पर्वतराज हिमालय की पुत्री माँ नंदा (पार्वती जी का स्वरूप) का विवाह भगवान शिव से हुआ था। शादी के बाद वे कैलाश पर्वत पर रहती हैं।12 साल में मायके आना: लोक कथाओं के अनुसार, माँ नंदा हर 12 साल में अपने मायके (उत्तराखंड के गढ़वाल-कुमाऊं क्षेत्र) आती हैं। जब वे वापस अपने ससुराल कैलाश लौटती हैं, तो उनके विदाई समारोह को ही 'नंदा राजजात' कहा जाता है। लाटू देवता मंदिर: मुख्य तथ्य एवं मान्यताएँ ​भौगोलिक स्थिति: उत्तराखंड के चमोली जिले के वाण (वांण) गांव में स्थित। ​धार्मिक संबंध: लाटू देवता को माँ नंदा देवी का धर्म भाई तथा ऐतिहासिक नंदा देवी राज जात यात्रा का मुख्य रक्षक और मार्गदर्शक माना जाता है। ​वैशाख पूर्णिमा पर कपाट: आम श्रद्धालुओं के लिए इस मंदिर के कपाट वर्ष में केवल एक बार, वैशाख पूर्णिमा के दिन ही खोले जाते हैं। शेष समय भक्त केवल बाहर से ही दर्शन और प्रार्थना कर सकते हैं। ​आंखों व मुंह पर पट्टी बांधकर पूजा: गर्भगृह के कपाट खुलने पर पुजारी अपनी आंखों पर पट्टी और मुंह पर कपड़ा बांधकर अंदर प्रवेश करते हैं। ​नागराज और मणि की पौराणिक मान्यता: यह जनश्रुति है कि मंदिर के अंदर नागराज अपनी अलौकिक व अद्भुत मणि के साथ विराजमान हैं। उस मणि का तेज इतना प्रचंड है कि यदि कोई उसे प्रत्यक्ष देख ले, तो उसकी दृष्टि जा सकती है। इसके अलावा, पुजारी के मुंह की सांस से प्रतिमा या मणि की पवित्रता प्रभावित न हो, इसीलिए मुंह पर भी कपड़ा बांधा जाता है। #nandadevi2026 #rajrajeswari #lohajung #mountains #uttrakhnd #travel #himalayas #nature #trekking #himalayantrip #camping #simplyheaven #viral #viralvideo #viralshorts #shorts #shortvideo #reels #reel #travel #himalayantrip #viral #travel