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मन रे जागत रहिए भाई।सतगुरु कबीर जी भाग -4 @ओशो वाणी#osho kabirdas

गहन विमर्श

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मन रे जागत रहिए भाई।सतगुरु कबीर जी भाग -4 @ओशो वाणी#osho kabirdas

41 просмотр · 10 мес. назад
गहन विमर्श
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मन रे जागत रहिए भाई। गाफिल होइ बसत मति खोवै, चोर मुसै घर जाई। षट्‌चक्र की कनक कोठरी, बस्त भाव है सोई। ताला कुंजी कुलफ के लागै, उघड़त बार न होई। पंच पहिरवा सोई गए हैं, बसतैं जागण लागी। जरा मरण व्यापै कछु नाही, गगन मंडल लै लागी। करत विचार मन ही मन उपजी, ना कहीं गया न आया। कहै कबीर संसा सब छूटा, राम रतन धन पाया।