मन रे जागत रहिए भाई।सतगुरु कबीर जी भाग -4 @ओशो वाणी#osho kabirdas
गहन विमर्श
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मन रे जागत रहिए भाई।सतगुरु कबीर जी भाग -4 @ओशो वाणी#osho kabirdas
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मन रे जागत रहिए भाई।
गाफिल होइ बसत मति खोवै, चोर मुसै घर जाई।
षट्चक्र की कनक कोठरी, बस्त भाव है सोई।
ताला कुंजी कुलफ के लागै, उघड़त बार न होई।
पंच पहिरवा सोई गए हैं, बसतैं जागण लागी।
जरा मरण व्यापै कछु नाही, गगन मंडल लै लागी।
करत विचार मन ही मन उपजी, ना कहीं गया न आया।
कहै कबीर संसा सब छूटा, राम रतन धन पाया।