Sharad Poonam ke Maharas Ke Pad || with lyrics in description || Purshottam mas
Vallabh Krupa
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Vallabh Krupa
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1.*ब्रजवनिता मध्य रसिक राधिका,बने शरद की राति हो।*
नृत्यत तत थेई गिरधर नागर,गौर श्याम अंग कांति हो।१।
एक एक गोपी विच विच माधो, बनी अनुपम भांति हो।
जयजय शब्द उच्चारत सुर मुनि कुसुमन बरख अघाति हो।२।
निरखि थक्यौ शशि आयौ शीश पर,क्यौं हूं न होत प्रभात हो।
"परमानंद प्रभु" मिलै यह अवसर, बनी है आज की बात हो।३।.. व्रज वनिता मध्य रसिक राधिका बनी शरद की रात्रि हो
2.*पूरी पूरी पूरणमासी पूरयो पूरयो शरद को चंदा ।।*
पूरयो है मुरली स्वर केदारो कृष्ण कला संपूरण भामीनी रास रच्यो सुख कंदा ।।१॥
तान मान गति मोहन मोहे कहियत औरही मन मोहंदा ।।
नृत्य करत श्री राधा प्यारी नचवत आप बिहारी उघटत थेईथेई थूंगन छंदा ॥२॥
*मन आकषिँ लियो व्रजसुंदरी जयजय रुचिर रुचिर शृती मंदा ।।
सखी असीस देत "हरिवंशी" तैसेई बिहरत श्री वृंदावन कुंवर कुंवारी नंदनंदा ॥३॥