माँ रेणुका जी के भव्य मंदिर की दर्शन यात्रा| नवरात्रि विशेष| 4K | दर्शन🙏
Tilak
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माँ रेणुका जी के भव्य मंदिर की दर्शन यात्रा| नवरात्रि विशेष| 4K | दर्शन🙏
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भक्तों! सादर नमन, वंदन और अभिनन्दन... भक्तों! हिमाचल प्रदेश में एक नहीं बल्कि कई प्राचीन मंदिर आपको देखने को मिलते हैं संभवतः इसीलिए हिमांचल प्रदेश को देवी देवताओं की लीलास्थली और पौराणिक पुण्यभूमि की शुभ संज्ञा प्रदान की गयी है। देवभूमि हिमांचल प्रदेश के सैकड़ों प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है माँ रेणुका जी का मंदिर…
पौराणिक कथा:
भक्तों रेणुका झील से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार - प्राचीनकाल में आर्यवर्त में हैहय वंशी क्षत्रीय राज करते थे। भृगुवंशी ब्राह्मण उनके राज पुरोहित थे। इसी भृगुवंश के महर्षि ऋचिक के घर महर्षि जमदग्नि का जन्म हुआ। इनका विवाह इक्ष्वाकु कुल के ऋषि रेणु की कन्या रेणुका से हुआ।
महर्षि जमदग्नि सपरिवार इसी क्षेत्र में तपस्या करने लगे। जिस स्थान पर उन्होंने तपस्या की वह तपे का टीला कहलाता है। महर्षि जमदग्नि के पास कामधेनु गाय थी जिसे पाने के लिए सभी तत्कालीन राजा, ऋषि लालायित थे। एका बार राजा सहस्त्रबाहु (कार्तिवीर्य) अर्जुन महर्षि जमदग्नि के पास कामधेनु मांगने पहुंचे। महर्षि जमदग्नि ने सहस्त्रबाहु का आदर सत्कार के किया और उसे समझाया कि कामधेनु गाय उसके पास कुबेर जी की धरोहर है। जिसे किसी को नहीं दे सकते। गुस्साए सहस्त्रबाहु ने महर्षि जमदग्नि की हत्या कर दी।
भक्तों यह देख मां रेणुका शोकवश रामसरोवर मे कूद गई। तब रामसरोवर ने मां रेणुका की देह को ढकने का प्रयास किया। इस प्रयास में रामसरोवर का आकार स्त्री देह समान हो गया। जो आज पवित्र रेणुका झील के नाम से प्रसिद्ध है।
भक्तों तब रेणुका और महर्षि जमदग्नि के पुत्र भगवान परशुराम ने सेना सहित सहस्त्रबाहु का वध कर दिया। और अपनी योगशक्ति से पिता जमदग्नि तथा मां रेणुका को जीवित कर दिया। माता रेणुका ने वचन दिया कि वह प्रति वर्ष इस दिन कार्तिक मास की देवोत्थान एकादशी को अपने पुत्र भगवान परशुराम से मिलने आया करेंगी।
रेणुका मंदिर:
भक्तों पुराने मंदिर के पास ही रेणुका मठ के नाम से प्रसिद्ध एक पुराना मंदिर है जिसका पुनर्निर्माण किया जा चुका है। इसमें रेणुका की मूर्ति रखी हुई है। लोगों का यह मत है कि यह मंदिर गोरखों ने बनवाया था।
गिरिगंगा:
भक्तों गिरीगंगा एक कथा के अनुसार- एक ऋषि हरिद्वार से का पवित गंगाजल ले कर कैलाश पर्वत की ओर जा रहे थे। कोटखाई में उनका पैर फ़िसल गया। जिससे भरे पात्र का कुछ जल गिर गया। तभी ऋषि के मुँह से निकला ""ये गिरिगंगा""। ऋषि के मुंह से ये शब्द निकलते ही वहाँ एक जलधारा निकली जो आज गिरिगंगा के नाम से प्रसिद्ध है। गिरिगंगा को पावन नदी समझकर हज़ारों श्रद्धालु इसमें स्नान करते हैं।
प्रयागराज:
भक्तों गिरिगंगा आगे जाकर जलाल नदी से मिलती है, लोग इस स्थान को प्रयागराज कहते हैं। यह स्थान त्रिवेणी के नाम से चर्चित है। इस त्रिवेणी में लाखों श्रद्धालु श्रद्धा पूर्वक स्नान करते हैं। क्योंकि उनका मत है कि जो पुण्य प्रयागराज के स्नान से प्राप्त होता है वही पुण्य इस स्थान में स्नान से प्राप्त होता है। वैसे रेणुका स्नान से पहले इस स्थान के स्नान को बहुत ही शुभ माना जाता है।
सोमेश्वर शिवलिंग:
भक्तों त्रिवेणी के पास ही एक कावेरी–वृक्ष है। जिसकी जड़ में पंचमुखी शिवलिंग है। जो सोमेश्वर नाम से प्रसिद्ध है। इस शिवलिंग पर हमेशा पानी की बूँदें टपकती रहती हैं।
कपिलेश्वर:
भक्तों पंचमुखा सोमेश्वर से कुछ ही दूरी पर कपिलेश्वर शिवलिंग है। यह शिवलिंग इस बात के लिए विख्यात है कि इस शिवलिंग श्रद्धापूर्वक गाय के दूध से अभिषेक करवाने से पुत्रहीन को एक साल के अवधि के अंदर पुत्र–रत्न की प्राप्ति होती है।
धुनुतरर्थ:
भक्तों तालाब के किनारे रेणुका झील के पैरों के समीप परशुराम तथा रेणुका देवी के पुराने मंदिर हैं। यहाँ रेणुका झील का पानी परशुराम तालाब से आकर मिलता है, जिसे धुनुतरर्थ कहते हैं। बताया जाता है कि इस स्थान का बड़ा धार्मिक महत्व है। ज़्यादातर यहाँ निःसंतान स्त्रियों की भीड़ होती है।
परिक्रमा:
भक्तों रेणुका झील की ओर जंगलों की चुनरी की भांति ढके धार टारण और महेंद्र नामक दो पर्वत हैं। इन्ही दोनों पर्वतों के बीच मंदिर की ओर से झील की परिक्रमा प्रारंभ होती है। परिक्रमा पाठ पर एक विशाल पीपल का वृक्ष है जिसके तने पर लोग अपना नाम गोद कर लिखते हैं परिक्रमा करते हुये आगे रेणुका माता का सिर नामक स्थान है। यहाँ पाई जानेवाली नरसल की घास में भक्तगण रेणुका माता की चोटी संवारने के भाव से परांदे बांधते हैं। भक्तों रेणुका झील की परिक्रमा शालीपाल नमक स्थान पर पूरी होती है जिसे माता के पैर के माना जाता है।
प्राकृतिक सौन्दर्य:
भक्तों रेणुका जी का धार्मिक महत्व, प्राकृतिक सौंदर्य, स्वच्छ पर्यटक स्थल, शांत वातावरण बरबस ही यात्रियों, पर्यटकों और प्रकृतिप्रेमियों को अपनी ओर शक्तिशाली चुंबक की भांति खींचता है।
भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव।तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद।दर्शन!🙏
इस कार्यक्रम के प्रत्येक एपिसोड में हम भक्तों को भारत के प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर, धाम या देवी-देवता के दर्शन तो करायेंगे ही, साथ ही उस मंदिर की महिमा उसके इतिहास और उसकी मान्यताओं से भी सन्मुख करायेंगे। तो देखना ना भूलें ज्ञान और भक्ति का अनोखा दिव्य दर्शन।🙏
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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