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क्या पश्चिमी ज्ञानोदय संकट में है? उत्तर-आधुनिकता से गांधी तक | प्रो. विश्वनाथ मिश्र | अन्विति Ep. 1

साहित्य गंगा : भाषा, साहित्य और विचार и Discovering knowledge with Vishwanath Mishra

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क्या पश्चिमी ज्ञानोदय संकट में है? उत्तर-आधुनिकता से गांधी तक | प्रो. विश्वनाथ मिश्र | अन्विति Ep. 1

140 просмотров · 11 часов назад
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क्या पश्चिमी ज्ञानोदय की परियोजना आज संकट में है? आधुनिकता और उत्तर-आधुनिकता की बहस के बीच गांधी हमें किस तरह का वैकल्पिक दृष्टिकोण उपलब्ध कराते हैं? बातचीत में संदर्भित पुस्तक इस एपिसोड में जिस पुस्तक और उससे जुड़े विचारों पर चर्चा की गई है, पुस्तक को Amazon पर देखने/खरीदने के लिए नीचे दिए गए लिंक का उपयोग कर सकते हैं: Amazon पर पुस्तक देखें: पाश्चिमी ज्ञानोदय के वैचारिक संकट : https://link.amazon/B03er94Mp⁠ अनागत गांधी : https://link.amazon/B0eE5YdUk हन्ना आरेंट : https://link.amazon/B0emvzwyg भारतीय राष्ट्रवाद : https://link.amazon/B0bYuimS4 स्तानिस्लाव्स्की अभिनेता की तैयारी : https://link.amazon/B03AfUsvH Affiliate Disclosure: यह एक Amazon Associate/Affiliate link है। इस लिंक के माध्यम से की गई योग्य खरीद पर मुझे Amazon से एक छोटा कमीशन प्राप्त हो सकता है। इससे आपके लिए पुस्तक की कीमत में कोई अतिरिक्त वृद्धि नहीं होती। ‘अन्विति’ के पहले एपिसोड में प्रो. विश्वनाथ मिश्र के साथ यह विस्तृत बातचीत पश्चिमी ज्ञानोदय, आधुनिकता, उत्तर-आधुनिकता, इतिहास, समाज, अस्मिता और गांधी के वैचारिक संसार से जुड़े कुछ बुनियादी प्रश्नों की पड़ताल करती है। आधुनिक विश्व को निर्मित करने वाली सबसे प्रभावशाली बौद्धिक धाराओं में पश्चिमी ज्ञानोदय (Western Enlightenment) का विशेष स्थान है। विवेक, तर्क, स्वतंत्रता, प्रगति, वैज्ञानिक चेतना और मनुष्य की स्वायत्तता जैसे विचारों ने आधुनिक समाज और उसकी संस्थाओं के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। ज्ञानोदय ने मनुष्य को परंपरा और स्थापित प्राधिकारों के सामने प्रश्न खड़े करने की वैचारिक शक्ति दी। लेकिन क्या ज्ञानोदय द्वारा प्रस्तुत आधुनिकता की परियोजना अपने घोषित उद्देश्यों को पूरा कर सकी? क्या तर्क, विज्ञान और प्रगति ने मनुष्य को अधिक स्वतंत्र बनाया, या उन्हीं के भीतर सत्ता, नियंत्रण, उपनिवेशवाद, हिंसा और वर्चस्व के नए रूप भी विकसित हुए? क्या आधुनिकता की उपलब्धियों और उसके संकटों को एक-दूसरे से अलग करके देखा जा सकता है? इसी से एक और महत्त्वपूर्ण प्रश्न निकलता है—क्या किसी विचार या पहचान को उसकी ऐतिहासिक और सामाजिक परिस्थितियों से अलग करके समझा जा सकता है? विचार केवल अमूर्त संरचनाएँ नहीं होते। उनके पीछे अपने समय की राजनीतिक परिस्थितियाँ, सामाजिक संरचनाएँ, सांस्कृतिक अनुभव, सत्ता-संबंध और ऐतिहासिक तनाव सक्रिय रहते हैं। इसलिए किसी विचार को समझने के लिए यह जानना भी आवश्यक है कि वह किन परिस्थितियों में पैदा हुआ और किन प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास कर रहा था। यहीं से बातचीत आधुनिकता और उत्तर-आधुनिकता (Postmodernism) की ओर बढ़ती है। उत्तर-आधुनिक चिंतन आधुनिकता द्वारा निर्मित अनेक सार्वभौमिक दावों, स्थिर श्रेणियों और महावृत्तांतों पर प्रश्न करता है। वह पूछता है कि जिन्हें हम सार्वभौमिक सत्य मानते हैं, क्या वे वास्तव में सार्वभौमिक हैं, या उनके पीछे भी विशिष्ट ऐतिहासिक परिस्थितियाँ और सत्ता-संबंध सक्रिय हैं? यह एपिसोड किसी विचारधारा के पक्ष अथवा विपक्ष में अंतिम निर्णय देने का प्रयास नहीं करता। इसके केंद्र में प्रश्न हैं—क्या विवेक अपने आप में पर्याप्त है? क्या प्रगति की कोई एक सार्वभौमिक दिशा हो सकती है? क्या आधुनिकता का अनुभव सभी समाजों के लिए समान रहा है? औपनिवेशिक समाजों ने आधुनिकता को किस तरह अनुभव किया? क्या किसी अस्मिता को इतिहास से बाहर रखकर समझा जा सकता है? और क्या गांधी आधुनिक सभ्यता की आलोचना के माध्यम से किसी वैकल्पिक भविष्य की कल्पना करने में हमारी सहायता कर सकते हैं? ‘अन्विति’ क्या है? ‘अन्विति’ साहित्य गंगा की वैचारिक संवाद-शृंखला है, जिसमें पुस्तकों, विचारों, अवधारणाओं और हमारे समय के महत्त्वपूर्ण प्रश्नों को केंद्र में रखकर विद्वानों, लेखकों और अध्येताओं के साथ गंभीर लेकिन सहज बातचीत प्रस्तुत की जाएगी। हमारा उद्देश्य कठिन प्रश्नों को कृत्रिम रूप से सरल बनाना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी भाषा में सामने लाना है जिसमें विद्यार्थी, शोधार्थी और सामान्य जिज्ञासु दर्शक भी इस बौद्धिक संवाद में शामिल हो सकें। अतिथि: प्रो. विश्वनाथ मिश्र शृंखला: अन्विति एपिसोड: 01 प्रस्तुति: साहित्य गंगा — भाषा, साहित्य और विचार यह ‘अन्विति’ की यात्रा का पहला पड़ाव है। बातचीत देखने के बाद Comment में अवश्य बताइए—क्या पश्चिमी ज्ञानोदय की परियोजना आज संकट में है? और क्या गांधी का चिंतन उस संकट को समझने के लिए कोई वैकल्पिक दृष्टि प्रदान करता है? साथ ही बताइए कि ‘अन्विति’ के आगामी एपिसोडों में आप किन पुस्तकों, विचारकों और प्रश्नों पर बातचीत देखना चाहेंगे। यदि साहित्य, भाषा, इतिहास, समाज, संस्कृति और विचार से जुड़ी ऐसी गंभीर बातचीत आपको उपयोगी लगती है, तो साहित्य गंगा को Subscribe करें। वीडियो को Like और Share करें ताकि यह संवाद अधिक विद्यार्थियों, शोधार्थियों और जिज्ञासु दर्शकों तक पहुँच सके। अन्विति | पुस्तक • विचार • संवाद साहित्य गंगा | भाषा, साहित्य और विचार #अन्विति #साहित्यगंगा #पश्चिमीज्ञानोदय #गांधी #आधुनिकता #उत्तरआधुनिकता #VishwanathMishra #Enlightenment #Modernity #Postmodernism #Gandhi #HindiPodcast