Padma Sadhana | पद्मसाधना | The Art of Living | Sri Sri Yoga | Hindi
The Art of Living HP
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Padma Sadhana | पद्मसाधना | The Art of Living | Sri Sri Yoga | Hindi
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पद्मसाधना, गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी द्वारा डिज़ाइन किया हुआ एक सुंदरयोग क्रम है, यह क्रम 12 आसन, प्राणायाम और ध्यान का एक संतुलित क्रम है।
पद्मसाधना के अभ्यास से सत्व गुण की वृद्धि होती है सत्व गुण सकारात्मकता, उत्साह और सद्भाव का गुण है, कहा जाता है कार्य सिद्धि सत्वे भवती महतां नोपकरणे किसी भी कार्य
की सिद्धि उपकरणों के माध्यम या संसाधनों से ही नहीं फलित होती बल्कि सत्व गुण से भी फलित होती है और पद्म साधना का अभ्यास सत्व गुण की वृद्धि करने में प्रभावशाली है।
प्रतिदिन पद्मसाधना के एक राउंड का अभ्यास करने से आपका शरीर और मनऊर्जावान होता है और शांत रहता है।
ट्रेनर: ईशा बुवा, श्री श्री स्कूल ऑफ योग
0:11 - इंट्रोडक्शन
1:54 - योग आसन
2:16 - बॉडी रोटेशन
3:30 - अर्ध शलभासन
4:41 - शलभासन
5:22 - भुजंगासन
6:16 - विपरीत शलभासन
6:43 - धनुरासन
7:19 - नौकासन
7:58 - पवनमुक्तासन
10:16 - विपरीत करणी
10:41 - सेतु बंधासन
11:08 - सर्वांगासन
11:54 - नटराज आसन
13:57 - अर्धमत्स्येंद्रासन
16:12 - पर्वतासन
16:44 - योग मुद्रा
17:35 - नाड़ी शोधन प्राणायाम
23:52 - ध्यान
39:20 - नाड़ी शोधन प्राणायाम
DISCLAIMER -
इस वीडियो में प्रस्तुत तकनीक और सुझावों का उद्देश्य उचित चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी नया व्यायाम शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें।हम इन तकनीकों का अभ्यास करते समय हुई चोटों के लिए कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं।
गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं या 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए योग की सलाह नहीं दी जाती है।
यदि आप बुजुर्ग हैं या आपको कोई पुरानी या गंभीर अवस्था है जैसे उच्च रक्तचाप, गर्दन या पीठ दर्द, गठिया, या हृदय रोग, तो आपको योग अभ्यास शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
महिलाओं के लिए विशेष निर्देश -
गर्भवती महिलाओं को किसी भी मुड़ने या पेट को कसने वाली मुद्रा का अभ्यास नहीं करना चाहिए और किसी भी व्यायाम या योग अभ्यास को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।मासिक चक्र के दौरान महिलाओं को पींछे मुड़ने,अधिक थकाने वाले तथा उल्टे होने योग अभ्यास जैसे सर्वांगासन को नहीं करना चाहिए।
सीखने के दौरान आसनों को खुली आंखों से किया जा सकता है ताकि आसनों को सुचारु रूप से किया जा सके। हालाँकि जब आप परिचित हों तो यह सलाह दी जाती है कि योग करते समय अपनी आँखें बंद रखें। जिससे की सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त हों और ध्यान भी गहन हो।