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EP 135: Sanyasi Bhikhmanga Nahi, Brahmand ka maalik hai 🌎🧘| 4th LAW by Ojha Sir

OJHA SIR GYANSHALA

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EP 135: Sanyasi Bhikhmanga Nahi, Brahmand ka maalik hai 🌎🧘| 4th LAW by Ojha Sir

24 707 просмотров · Трансляция закончилась 7 дн. назад
OJHA SIR GYANSHALA
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क्या एक संन्यासी वास्तव में भिखारी होता है? या फिर संन्यास का अर्थ कुछ बिल्कुल अलग और कहीं अधिक गहरा है? इस वीडियो में ओझा सर यथार्थ गीता के पंचम अध्याय के छठे श्लोक के माध्यम से संन्यास, निष्काम कर्मयोग, ज्ञानयोग और वास्तविक आध्यात्मिक जीवन का अर्थ समझाते हैं। “संन्यासी भिखमंगा है?” — यह सवाल केवल संन्यास के बाहरी रूप को लेकर नहीं, बल्कि हमारे संन्यास और त्याग को समझने के तरीके पर भी एक बड़ा प्रश्न है। वीडियो में समझाया गया है कि क्या केवल बाहरी रूप बदल लेना संन्यास है, या संन्यास का वास्तविक अर्थ है सर्वस्व का न्यास—अपने कर्म, इच्छाओं और जीवन को एक उच्च उद्देश्य के प्रति समर्पित करना। साथ ही चर्चा होती है कि ज्ञानयोग और निष्काम कर्मयोग में क्या संबंध है, ध्यान से अनुशासन कैसे विकसित होता है और किस प्रकार अनुशासन से निरंतरता तथा निरंतरता से कर्म और सफलता का मार्ग बनता है। यथार्थ गीता के इस महत्वपूर्ण श्लोक के माध्यम से ओझा सर यह भी समझाते हैं कि वास्तविक आध्यात्मिकता केवल धार्मिक दिखने या ग्रंथ पढ़ने तक सीमित नहीं है। ज्ञान तभी सार्थक है जब वह हमारे जीवन, विचार और कर्म में दिखाई दे। इस वीडियो में जानिए: संन्यास का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या संन्यासी को भिखारी समझना सही है? यथार्थ गीता के पंचम अध्याय के छठे श्लोक में कौन-सा गहरा सूत्र छिपा है? ज्ञानयोग और निष्काम कर्मयोग में क्या संबंध है? सच्चा त्याग क्या है—वस्तुओं का या इच्छाओं का? ध्यान और अनुशासन का हमारे जीवन से क्या संबंध है? यह वीडियो केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि अपने जीवन, मन, इच्छाओं और कर्मों पर गंभीरता से विचार करने के लिए है। #ojhasirmotivation #upscmotivation #saints #spirituality #meditation #GEETA #krishna #ojhasir #bharat #lifelessons Join this channel to get access to perks:    / @ojhasirgyanshala