Перейти к содержимому

बाबा हजरत शाह फतेह मोहम्मद कलन्दरपुर आजमगढ़ | Allah Janta Hai Mohammad Ka Martaba | Zila Azamgarh

Zila Azamgarh

0:00 / 0:00

बाबा हजरत शाह फतेह मोहम्मद कलन्दरपुर आजमगढ़ | Allah Janta Hai Mohammad Ka Martaba | Zila Azamgarh

4 822 просмотра · 5 лет назад
Zila Azamgarh
2,67 тыс. подписчиков
4 822 просмотра · 5 лет назад
शाह फतेह कलन्दरपुर आजमगढ़ उत्तर प्रदेश जहांनिया खानदान का नस्ली कारवां कलन्दरी खानदान की बदौलत आगे बढ़ा। राजा इदारत जहां के सगे छोटे भाई राजा बशारत जहां सूफी हो गए थे। इबादत व रियाजत के लिए उन्होंने कलंदरपुर आजमगढ़ के करीब लेडुवावर नामक स्थान को अपना आस्ताना बनाया था। आजकल लोग उस स्थान को बशारत गंज के नाम से जानते हैं। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में राजा बशारत जहां के तीन बेटे शहीद हो गए थे।दो बेटे सफदर जहां (चिलबिल शाह) वह मेंहदी जहां(दरबारे शहीद)शाही किला जौनपुर उत्तर प्रदेश भारत में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हो गए थे। तीसरा बेटा अब्बास जहां राजा इदारत जहां की माहुल राजधानी आजमगढ़ की फौज के कमांडर इन चीफ थे। अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए वह भी शहीद हो गए थे। राजा इदारत जहां की शहादत के बाद अंग्रेज राजा साहब के खानदान के लोगों को चुन, चुन कर मारने लगे। इस लिए जहां निया खानदान के लोग अपनी पहचान को छुपा कर ज़िन्दगी गुजारने लगे। राजा बशारत जहां ने अपने बाद की नस्लों के नाम के आगे से जहां टाइटिल को हटा दिया था। तब से आज तक राजा बशारत जहां की नस्लों के लोग अपने नाम के आगे जहां टाइटिल नहीं लगाते है। राजा बशारत जहां के आखिरी बेटे । अंजुम जहां बच गए थे। पहचान को छुपाने के लिए राजा बशारत जहां ने अपने बेटे अंजुम जहां का नाम बदलकर कर मीर खुबुल्ला रख दिया।। और नक़ाब ओढ़ कर ज़िन्दगी गुजारने लगे। राजा बशारत जहां की शादी किछौछे शरीफ बसखारी अम्बेडकर नगर उत्तर प्रदेश में हज़रत मखदूम शाह अशरफ जहानी जहां गश्त किछौछवी के खानदान में हुई थी।जहांनिया खानदान व कलन्दरी खानदान का शादी का सिलसिला 1857 के बाद तीन पीढ़ियों तक चलता रहा। जहां निया खानदान की रगों में कलन्दरी खानदान का खून व कलन्दरी खानदान की रगों में जहानिया खानदान का खून दौड़ रहा है। दोनों खानदान में शादी के सिलसिले से खूनी रिश्ता है चूंकि शाह फतेह कलन्दर आजमगढ़ की चौकी खेतासराय जौनपुर में आई थी। इसी लिए कलन्दरी खानदान का एक हिस्सा खेतासराय जौनपुर में भी रहता है। मरहूम सैयद इश्तेयाक अहमद रिटायर्ड लेक्चरर मोहम्मद हसन इन्टर कॉलेज जौनपुर तथा मरहूम एडवोकेट काजी जमीरुल हसन का सिलसिला कलन्दरी खानदान से है। इन दोनों लोगों का घर अटाला मस्जिद के पीछे जौनपुर में मौजूद है। मरहूम सैयद इश्तेयाक अहमद के बेटे डॉ फजलुर्रहमान व इंजीनियर खलीलुर्रहमान दिल्ली में रहते हैं। डॉ फजलुर्रहमान का जल्दी ही इन्तेकाल हो गया है। मरहूम काजी जमीरूल हसन के चार बेटियां हैं। एक बेटी सैयदा अजरा फातमा की शादी पाकिस्तान में हुई है। तीन बेटियां जौनपुर में रहती हैं। जिसमें से दो बेटियां सैयदा सबीहा फात्मा और सैयदा कनीज फात्मा(अंजुम) अटाला मस्जिद के पीछे रहती हैं। एक बेटी सैयदा तस्नीम फात्मा की शादी मौलाना फसीह‌उद्दीन के बेटे हादी हसन के साथ मीर मस्त मोहल्ला जौनपुर में हुई है। चूंकि राजा बशारत जहां और कलन्दरी खानदान में शादी के सिलसिले से खूनी रिश्ता है। इस लिए कलन्दरी खानदान के लोग जहां निया खानदान के राजो को भी जानते हैं। राजा अशरफ हुसैन, मरहूम सैयद इश्तेयाक अहमद के वालिद और मरहूम काजी जमीरूल हसन एडवोकेट की वालदा ने राजा इदारत जहां और राजा बशारत जहां के खानदान के दुश्मनो से जहानिया खानदान की बेशकीमती चीज़ों और निशानियों की हिफाजत के लिए जान की बाजी लगा दी। और दुश्मनों को हावी नहीं होने दिया। इसके बाद मरहूम काजी जमीरूल हसन एडवोकेट , मरहूम सैयद इश्तेयाक अहमद व मरहूम सैयद मुश्ताक हुसैन, मरहूम सैयद इबादत हुसैन ने जहानिया खानदान की बेशकीमती चीज़ों और निशानियों की हिफाजत की। इसके बाद मरहूम काजी जमीरूल हसन एडवोकेट की बहादुर बेटी सैयदा सबीहा फात्मा और मरहूम सैयद इश्तेयाक अहमद के बहादुर बेटे डॉ सैयद फज‌लुर्रहमान ने जहानिया खानदान की बेशकीमती चीज़ों और निशानियों की हिफाजत की। कुछ महीनों पहले डॉ सैयद फज‌लुर्रहमान का इन्तेकाल हो गया है। राजा सैयद जुल्फिकार जहां मरहूम काजी जमीरूल हसन एडवोकेट के यहां अंक्सर आया करते थे और वह सैयदा सबीहा फात्मा की बहुत तारीफ किया करते थे। और राजा जुल्फिकार जहां कहा करते थे कि सैयदा सबीहा फात्मा में खुदा दाद सलाहियतें हैं (ईश्वरीय प्रतिभा) वह कहा करते थे कि सैयदा सबीहा फात्मा में रानी लक्ष्मीबाई व बेगम हजरत महल जैसी खूबियां मौजूद हैं। सैयदा सबीहा फात्मा जहानिया खानदान व कलन्दरी खानदान की क्राऊन ,आन, बान व शान हैं। हम सब को सबीहा फात्मा पर गर्व है। मैं सच कहता हूं कि अगर सैयदा सबीहा फात्मा मेरी बहन न होती तो मैं अकेले राजा इदारत जहां और राजा बशारत जहां की बेशकीमती चीज़ों और निशानियों की हिफाजत जहां निया खानदान के दुश्मनों से न कर पाता। हज़रत कुतुब बीनाये दिल शाह की असली मज़ार जौनपुर जेल के अंदर है और कब्र की शबीह *(नकल) जेल के बाहर है हज़रत अशरफ मख्दूम शाह जहानी जहां गश्त किछौछवी का आस्ताना व मकबरा बसखारी किछौछे शरीफ अम्बेडकर नगर उत्तर प्रदेश भारत में है। हज़रत आरिफ हुसैनी आप के छोटे भाई थे। आप का आबाई वतन, मूल स्थान समनान ईरान था। हज़रत अशरफ मख्दूम शाह समनानी समनान राज्य ईरान के बादशाह थे । आप के शासन काल में जनता बहुत खुशहाल थी। आप प्रख्यात विद्वान भी थे। आध्यात्मवाद की ओर आप का अधिक झुकाव था। इसी लिए आप ने समनान ईरान की बादशाहत छोड़ कर इसे अपने छोटे भाई हज़रत आरिफ हुसैनी के सुपुर्द कर के सत्य की खोज में निकल पड़े। राजा इदारत जहां व राजा बशारत जहां के जहानिया खानदान का नस्ली कारवां हज़रत अशरफ मख्दूम शाह जहानी जहां गश्त किछौछवी के सगे छोटे भाई हज़रत आरिफ हुसैनी से चला है Music Credits- TITLE - ALLAH JANTA HAI MUHAMMAD KA MARTABA ARTIST - NOORAN LAL LABEL - HI-TECH MUSIC LTD.