Перейти к содержимому

पर्जन्य सूक्त ५:८३:७ सप्तम मंत्र अर्थ और स्पष्टीकरण | Parjanya Sukta 5:83:7 | Parjanya Sukta 5:83

Best Talks

0:00 / 0:00

पर्जन्य सूक्त ५:८३:७ सप्तम मंत्र अर्थ और स्पष्टीकरण | Parjanya Sukta 5:83:7 | Parjanya Sukta 5:83

9 просмотров · 2 нед. назад
Best Talks
613 подписчиков
9 просмотров · 2 нед. назад
पर्जन्य सूक्त ५:८३:७ सप्तम मंत्र अर्थ और स्पष्टीकरण | Parjanya Sukta 5:83:7 | Parjanya Sukta 5:83 ऋग्वेद 5.83.7 | पर्जन्य देव की वर्षादायी शक्ति | मंत्रार्थ एवं भावार्थ मेघों की गर्जना, जल से परिपूर्ण रथ और पृथ्वी की ओर उतरती वर्षा—यह मंत्र प्रकृति की जीवनदायिनी शक्ति का सजीव चित्र प्रस्तुत करता है। 🌧️ इस मंत्र में महर्षि अत्रि भौम ने पर्जन्य देव से संचित जल को पृथ्वी पर बरसाने तथा ऊँचे और निचले सभी स्थानों को जल से परिपूर्ण करने की प्रार्थना की है। इसके भावार्थ में वर्षा के इसी स्वरूप से प्रेरणा मिलती है कि जिस प्रकार जल ऊँचे-निचले सभी स्थानों तक पहुँचकर जीवन का पोषण करता है, उसी प्रकार मनुष्य का ज्ञान, सामर्थ्य और सद्गुण भी सभी के कल्याण में उपयोगी होने चाहिए। 📖 ऋषि: अत्रि भौम | देवता: पर्जन्य | छंद: त्रिष्टुप 🙏 वैदिक ज्ञान के सरल और सारगर्भित अध्ययन के लिए Best Talks को Subscribe करें। A previous video "पर्जन्य सूक्त ५:८३:६ षष्ठम मंत्र अर्थ और स्पष्टीकरण | Parjanya Sukta 5:83:6 | Parjanya Sukta 5:83" link is given below    • पर्जन्य सूक्त ५:८३:६ षष्ठम मंत्र अर्थ और स...   #Rigveda #RigvedaHindi #Rigveda5.83.7 #ParjanyaSukta #ParjanyaDev #ParjanyaMantra #VedicKnowledge #VedaKaGyan #SanskritMantra #SanskritMeaning #RigvedaMantra #MantraMeaning #VedicWisdom #HinduScriptures #BestTalks