हसदेव अरण्य: केंद्र ने खोली विष्णुदेव साय सरकार की पोल! Tara Coal Block विवाद का पूरा सच
CG KHABAR
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हसदेव अरण्य: केंद्र ने खोली विष्णुदेव साय सरकार की पोल! Tara Coal Block विवाद का पूरा सच
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छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य (Hasdeo Aranya) के तारा कोल ब्लॉक (Tara Coal Block Auction) की नीलामी को लेकर केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय ने एक बड़ा खुलासा किया है। क्या मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने खुद पत्र लिखकर इस घने जंगल को खनन और नीलामी के लिए खोलने की मंजूरी दी थी? जानिए इस पूरे दस्तावेजी विवाद, विधानसभा के संकल्प और अडानी कनेक्शन (Adani Connection) का पूरा सच।
इस खोजी रिपोर्ट में हम विश्लेषण कर रहे हैं कि साल 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित अशासकीय संकल्प और 2023 में सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के रुख के बावजूद, दिसंबर 2025 में ऐसा क्या बदला कि 'तारा कोल ब्लॉक' को दोबारा नीलाम कर दिया गया?
केंद्रीय कोयला मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, 11 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर इस ब्लॉक को अगले दौर की नीलामी में शामिल करने का अनुरोध किया था। इस फैसले का सीधा फायदा अडानी समूह (Adani Group) से जुड़ी कंपनी 'सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड' को मिला है।
हसदेव अरण्य के तारा कोल ब्लॉक को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि केंद्र की भाजपा सरकार के कोयला मंत्रालय के बयान ने अपनी ही पार्टी की छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की भूमिका को सवालों के घेरे में क्यों ला दिया? केंद्र सरकार के बयान के मुताबिक, 2023 में तारा कोल ब्लॉक को नीलामी से बाहर रखने की वजह तत्कालीन छत्तीसगढ़ सरकार का आग्रह था। लेकिन 11 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार की ओर से तारा कोल ब्लॉक को अगली नीलामी में शामिल करने की अनुमति दिए जाने संबंधी पत्र केंद्र को मिला।
अगर 2023 में तारा को नीलामी से बाहर था, तो 2025 में उसे फिर नीलामी के रास्ते पर लाने के लिए छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने सहमति क्यों दी?
इस वीडियो में जानिए:
क्या संशोधित तारा कोल ब्लॉक वाकई लेमरू एलीफेंट कॉरिडोर (Lemru Elephant Corridor) से बाहर है?
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