गिला कहानी मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य मानसरोवर कहानियां 🙏🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩🚩🙏🚩🙏🚩🚩
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मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'गिला' एक मध्यमवर्गीय परिवार की घरेलू और सामाजिक परिस्थितियों पर आधारित एक बेहद अनूठी और मनोवैज्ञानिक कहानी है। 'गिला' शब्द का अर्थ होता है—शिकायत या शिकवा। यह कहानी पूरी तरह से एक पत्नी के दृष्टिकोण (उत्तम पुरुष/First Person) से लिखी गई है, जिसमें वह अपने पति के व्यवहार से जुड़ी शिकायतें बयां करती है।
कहानी का मुख्य कथ्य और सारांश
बाहर वाले के लिए देवता, घर के लिए आफत: पत्नी की मुख्य शिकायत (गिला) यह है कि उसके पति संसार की नजर में बेहद सज्जन, सीधे, उदार और सौम्य व्यक्ति हैं, लेकिन उनके इस अत्यधिक सीधेपन का खामियाजा पूरे परिवार और पत्नी को भुगतना पड़ता है।
दूसरों की मदद और घर की उपेक्षा: पति दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। कोई भी मित्र या परिचित उनसे पैसे उधार मांग ले जाता है और कभी वापस नहीं लौटाता। पत्नी जब उनसे अपने पैसे वापस मांगने को कहती है, तो वे झेंप जाते हैं क्योंकि उनसे किसी को 'ना' नहीं कहा जाता।
बाजार की नासमझी: पति जब भी बाजार से राशन या घर का सामान लाते हैं, तो हमेशा खराब, मिलावटी और महंगी चीजों वाली दुकानों से ठगा कर आ जाते हैं। पत्नी के टोकने पर भी वे अपनी आदत नहीं बदलते।
नौकरों और बच्चों पर ढीला नियंत्रण: घर के नौकर कामचोर हैं और सही से झाड़ू तक नहीं लगाते, लेकिन पति उनके दोषों को भी गुण बताते हैं या उन पर पर्दा डाल देते हैं। बच्चों को डांटने या अनुशासित करने के बजाय वे उनके प्रति बहुत ढीला रवैया रखते हैं।
विरोधाभास और गहरा प्रेम (निष्कर्ष): पूरी कहानी में पत्नी अपने पति की कमियों और उनके 'भोंदू' व्यवहार की शिकायतें करती रहती है। परंतु, कहानी के अंत तक आते-आते यह स्पष्ट हो जाता है कि इन तमाम शिकायतों के पीछे पति के प्रति उसका अथाह प्रेम, आदर और सुरक्षा की भावना छिपी है। वह इस बात से संतुष्ट है कि उसका पति जैसा भी है, निष्कपट है और उनका अटूट रिश्ता समाज के दिखावे से बहुत ऊपर है।
यह कहानी यह दर्शाती है कि समाज जिसे 'बड़ा परोपकारी और भला' कहता है, कई बार उसके अपने परिवार को उसके इस भलेपन की कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।