नोटबंदी (विमुद्रीकरण or Demonetization) और उसके प्रभाव - अर्थव्यवस्था का औपचारिकीकरण
India Rising 21st Century
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नोटबंदी (विमुद्रीकरण or Demonetization) और उसके प्रभाव - अर्थव्यवस्था का औपचारिकीकरण
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विमुद्रीकरण और अर्थव्यवस्था का औपचारिकीकरण: भारत में वित्तीय व्यवस्था की सफाई | इस वीडियो में देखिए कि कैसे विमुद्रीकरण (Demonetization) ने नकद अर्थव्यवस्था की गुमनामी को खत्म करके देश में कर अनुपालन (Tax Compliance) और डिजिटल वित्तीय ढांचे को मजबूत किया। बैंकों में वापस आए ₹15.28 लाख करोड़ के नकद प्रवाह ने डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से अघोषित संपत्ति और फर्जी (Shell) कंपनियों पर कर विभाग को सीधी कार्रवाई करने का अधिकार दिया।
मुख्य बिंदु:
नोटबंदी से पूर्व की स्थिति: अर्थव्यवस्था में ₹18.54 लाख करोड़ की नकदी और ₹10 लाख करोड़ से अधिक की समानांतर अर्थव्यवस्था (Black Money)।
ऑपरेशन क्लीन मनी: 18 लाख संदिग्ध खातों की पहचान, 2.26 लाख बोगस/शेल कंपनियों का पंजीकरण रद्द।
करदाताओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि: FY18 में 1.28 करोड़ नए करदाता जुड़े और प्रत्यक्ष कर संग्रह ₹10.02 लाख करोड़ तक पहुंचा।
सुरक्षा और आतंकवाद पर प्रहार: ₹410 करोड़ के नकली नोट पकड़े गए और टेरर फंडिंग के नकद रास्तों पर रोक।
डिजिटल क्रांति और UPI: महीने के ₹0.5 अरब से बढ़कर ₹598 अरब तक पहुंचे UPI लेनदेन।
डेटा स्रोत: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT), केंद्रीय बजट रिपोर्ट और वित्त मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़े।
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