शब्दों में प्राण कैसे जागते हैं? | भोला छलिया (शिव कृष्ण) पुराण | कलियुग महापुराण | @कथापीयूष020301B
कथा पीयूष
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शब्दों में प्राण कैसे जागते हैं? | भोला छलिया (शिव कृष्ण) पुराण | कलियुग महापुराण | @कथापीयूष020301B
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@कथापीयूष020301B = कलियुग महापुराण (कुल 207 पुराण) | पुराण क्रमांक: 02 - भोला छलिया (शिव-कृष्ण) पुराण | अध्याय: 03 | कथा: 01B
शब्दों में प्राण कैसे जागते हैं? | भोला छलिया (शिव कृष्ण) पुराण | कलियुग महापुराण | @कथापीयूष020301B
जो निःशब्द को जानते हैं, उन्हीं के शब्द जीवंत होते हैं, प्राणवान होते हैं। आखिर निःशब्द का रहस्य क्या है? जानिए भोला छलिया (शिव-कृष्ण) की इस अद्भुत कथा में, जहाँ एक वाचाल पंडित मौन की शक्ति को पहचानकर अपनी वाणी का वास्तविक प्राण खोज लेता है।
नैमिषारण्य में श्रुति देवी द्वारा सुनाई गई यह कथा बताती है कि केवल शास्त्रों का ज्ञान पर्याप्त नहीं है। जब शब्द मौन की गहराई से जन्म लेते हैं, तभी वे हृदय को स्पर्श करते हैं।
🔱 कथा का मूल सूत्र: ॥ जो निःशब्द को जानते हैं, उन्हीं के शब्द जीवंत होते हैं, प्राणवान होते हैं ॥
🙏 कलियुग महापुराण — भोला छलिया (शिव-कृष्ण) पुराण प्रथम सूत्र कथा: निःशब्द का रहस्य।
📌 अस्वीकरण: यह कथा कल्पना, चिंतन एवं व्यक्तिगत अनुभूति पर आधारित एक रचनात्मक प्रस्तुति है। इसका उद्देश्य ज्ञानवर्धन और मनोरंजन है।
— अज्ञानी
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Katha Piyush
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