Перейти к содержимому

Geet Govind Ashtapadi 6 | Sakhi He Keshimathanamudaram | सखि हे केशिमथनमुदारम् | Jayadeva Goswami

Shri Sant Kripa

0:00 / 0:00

Geet Govind Ashtapadi 6 | Sakhi He Keshimathanamudaram | सखि हे केशिमथनमुदारम् | Jayadeva Goswami

152 860 просмотров · 2 года назад
Shri Sant Kripa
22,5 тыс. подписчиков
152 860 просмотров · 2 года назад
Geet Govind Ashtapadi 6 | Sakhi He Keshimathanamudaram | सखि हे केशिमथनमुदारम् | Jayadeva Goswami हस्तस्रस्तविलासवंशमनृजुभ्रूवल्लिमद्बल्लवी । वृन्दोत्सारिदृगन्तवीक्षितमतिस्वेदार्द्रगण्डस्थलम् मामुद्वीक्ष्य विलक्षितंस्मित सुधामुग्धाननं कानने गोविन्दं व्रजसुन्दरीगणवृतं पश्यामि हृष्यामि च ॥ सखि हे केशिमथनमुदारं रमय मया सह मदनमनोरथभावितया सविकारम् ॥सविकारम् १॥ प्रथमसमागमलज्जितया पटुचाटुशतैरनुकूलम् । मृदुमधुरस्मितभाषितया शिथिलीकृतजधनदुकूलम् ॥२॥ सखि हे किसलयशयननिवेशितया चिरमुरसि ममैव शयानम् । कृतपरिरम्भणचुम्बनया परिरभ्य कृताधरपानम् ॥ ३॥ सखि हे अलसनिमीलितलोचनया पुलकावलिललितकपोलम् । श्रमजलसकलकलेवरया वरमदनमदादतिलोलम् ॥ ४॥ सखि हे कोकिलकलरवकूजितया जितमनसिजतन्त्रविचारम् । श्लथकुसुमाकुलकुन्तलया नखलिखितघनस्तनभारम् ॥५॥ सखि हे चरणरणितमणिनूपुरया परिपूरितसुरतवितानम् । मुखरविश‍ृङ्खलमेखलया सकचग्रहचुम्बनदानम् ॥६॥ सखि हे रतिसुखसमयरसालसया दरमुकुलितनयनसरोजम् । निःसहनिपतिततनुलतया मधुसूदनमुदितमनोजम् ॥७॥ सखि हे श्रीजयदेवभणितमिदमतिशयमधुरिपुनिधुवनशीलम् । सुखमुत्कण्ठितगोपवधूकथितं वितनोतु सलीलम् ॥८॥ सखि हे गीत गोविंद अष्टपदी 6 सखि हे केशिमथनमुदारं जयदेव गोस्वामी राधा कृष्ण भजन संस्कृत भजन Geet Govind Ashtpadi Krishna Bhajan #GeetGovind #Ashtpadi6 #SakhiHeKeshimathanamudaram #Jayadeva #RadhaKrishna #KrishnaBhajan #BhaktiMusic #SanskritBhajan