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बद्रीनाथ मे पित्रों की सर्वश्रेष्ठ पूजा पित्र मोक्ष प्रदान Badrinath mai pitrokipoojathesaansirider

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बद्रीनाथ मे पित्रों की सर्वश्रेष्ठ पूजा पित्र मोक्ष प्रदान Badrinath mai pitrokipoojathesaansirider

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बद्रीनाथ मे पित्रों की सर्वश्रेष्ठ पूजा पित्र मोक्ष प्रदान Badrinath mai pitro ki pooja the saansi rider Instagram I'd the saansi rider official Facebook I'd Praveen Singh malliya video shoot on GoPro Hero 9 apple iphone 12 pro Amazon tripod digitek wireless mic axor helmets venomous dominar 400cc bike 🚲 royal Enfield painners sinle topbox Leo riders riding jacket 🧥 leval 2 imported riding paint axor hand 🧤 gloves helmet microphone rode laviliar deckotlan warmer jacket पितरों की मुक्ति के लिए बद्रीनाथ धाम में स्थित ब्रह्मकपाल में पिंड दान किया जाता है। स्कन्द पुराण के अनुसार इस पवित्र स्थान को गया से आठ गुना अधिक फलदाई पितृ कारक तीर्थ कहा गया है। यहां विधिपूर्वक पिंडदान करने से पितरों को नरक लोक से मोक्ष मिल जाता है। सनातन धर्म में श्राद्धपक्ष का बहुत महत्व है। पितरों के लिए समर्पित ये पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन दिनों पितृ,पितृलोक से मृत्यु लोक में अपने वंशजों से सूक्ष्मरूप में मिलने आते हैं और हम उनके सम्मान में अपनी सामर्थ्यनुसार उनका स्वागत-सत्कार करते हैं। इसके परिणामस्वरूप सभी पितृ अपनी पसंद का भोजन व सम्मान पाकर प्रसन्न व संतुष्ट होकर परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य, दीर्घायु, वंशवृद्धि व अनेक प्रकार के आशीर्वाद देकर पितृलोक लौट जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि पितृ दोष के कारण व्यक्ति के जीवन में सदैव परेशानी, संकट और जीवन में संघर्ष बने रहते हैं। इसलिए इस दोष का निवारण बहुत आवश्यक बताया गया है। पितरों के मोक्ष के लिए ब्रह्मकपाल तीर्थ पितरों की मुक्ति के लिए बद्रीनाथ धाम में स्थित ब्रह्मकपाल में पिंड दान किया जाता है। स्कन्द पुराण के अनुसार इस पवित्र स्थान को गया से आठ गुना अधिक फलदाई पितृ कारक तीर्थ कहा गया है। यहां विधिपूर्वक पिंडदान करने से पितरों को नरक लोक से मोक्ष मिल जाता है। साथ ही परिजनों को भी पितृदोष मुक्ति मिल जाती है। इसीलिए ब्रह्मकपाल को पितरों की मोक्ष प्राप्ति का सर्वोच्च तीर्थ कहा गया है। ग्रंथों में उल्लेख है कि ब्रह्मकपाल में पिंडदान करने के बाद फिर कहीं पिंडदान की जरूरत नहीं रह जाती। पितृ पूजा कौन कर सकता है? कौन कर सकता है पितरों का श्राद्ध या तर्पण हिंदू धर्म के अनुसार, घर के मुखिया या प्रथम पुरुष अपने पितरों का श्राद्ध कर सकता है। अगर मुखिया नहीं है, तो घर का कोई अन्य पुरुष अपने पितरों को जल चढ़ा सकता है। इसके अलावा पुत्र और नाती भी तर्पण कर सकता है। शास्त्रों के अनुसार, पिता का श्राद्ध पुत्र को ही करना चाहिए।