क्यों इतना सोचती हो (@diaryofstudents) (@tseries) #trending #motivation #song #video
Diary of students
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Diary of students
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🎵 क्यों इतना सोचती हो
क्यों इतना सोचती हो?
क्या होगा आगे?
कहाँ पहुँचोगी?
कौन समझेगा तुम्हें?
किससे पीछे रह गई...
किससे आगे निकलना है...
इतना सब सोचते-सोचते...
कभी खुद के साथ बैठी हो?
हर सुबह एक सवाल लिए,
तुम आँखें खोलती हो...
कल की चिंता लेकर
आज को क्यों खोती हो?
सबकी अपनी मंज़िल है,
सबका अपना रास्ता...
फिर क्यों अपनी राह को
दूसरों से तौलती हो?
किसी की हँसी देखकर
अपनी खुशी मत भूलो...
किसी की जीत देखकर
अपनी उड़ान मत रोको।
तुम देर से चल रही हो,
तो क्या हुआ?
हर फूल का मौसम
एक जैसा तो नहीं होता।
कुछ सपने देर से मिलेंगे...
कुछ रास्ते बदलेंगे...
कुछ लोग साथ छोड़ेंगे...
कुछ अपने भी बदलेंगे...
पर हर मोड़ पर
एक बात याद रखना...
तुम्हें हर चीज़ का जवाब
आज नहीं चाहिए।
क्यों इतना सोचती हो?
थोड़ा सा जी भी लो...
जो आज तुम्हारे पास है,
उसे आज ही जी लो।
कल की धूप कैसी होगी,
कौन जाने?
आज की इस शाम को
तो मुस्कुरा के देखो।
क्यों इतना सोचती हो?
हर बात का हल नहीं होता...
कुछ रास्ते चलते-चलते
खुद ही खुलते हैं।
कभी खुद को कम समझा,
कभी खुद को दोष दिया...
"मैं ऐसी क्यों हूँ?"
कहकर खुद को ही रोक लिया।
तुम्हें हर किसी जैसा
बनना ज़रूरी नहीं...
तुम्हारे हिस्से की कहानी
किसी और जैसी नहीं।
जो टूट गया...
उसे हर बार जोड़ना भी
ज़रूरी नहीं।
कुछ चीज़ें जाती हैं...
ताकि नई जगह बन सके।
हर जवाब मिल जाए...
ऐसा भी तो नहीं।
हर सपना पूरा हो...
ऐसा भी तो नहीं।
कभी हार भी मिलेगी...
कभी जीत भी मिलेगी...
यही तो ज़िंदगी है।
क्यों इतना सोचती हो?
थोड़ा सा जी भी लो...
जो दिल कहना चाहता है,
कभी वो भी सुन लो।
हर किसी को खुश करते-करते
खुद को मत खो देना...
अपनी आँखों में
अपने लिए भी
थोड़ा सपना रख लो।
क्यों इतना सोचती हो?
ज़िंदगी भागी नहीं जा रही...
एक दिन...
तुम पीछे मुड़कर देखोगी...
और समझोगी...
जिन बातों पर
तुमने कितनी रातें रोकर गुज़ारी थीं...
उनमें से बहुत सी...
कभी हुई ही नहीं।
जिन लोगों को खोने से डरती थीं...
उनके बिना भी
तुम मुस्कुराना सीख गईं।
और जिस लड़की को
तुम हर दिन बदलना चाहती थीं...
वही लड़की
तुम्हें यहाँ तक लेकर आई।
तो...
उसे थोड़ा प्यार भी दे दो।
क्यों इतना सोचती हो?
तुम ठीक हो... सुन रही हो?
हर दिन जीतना ज़रूरी नहीं...
कभी बस जीना भी।
अगर रास्ता साफ़ नहीं है...
तो धीरे चलना।
अगर दिल थक गया है...
तो थोड़ा रुकना।
मंज़िल कहीं भाग नहीं रही...
तुम्हें बस...
खुद से दूर नहीं जाना।
क्यों इतना सोचती हो...
जो खो गया,
वो कहानी थी...
जो सामने है,
वो ज़िंदगी है।
आज सब ठीक नहीं है...
कोई बात नहीं।
कल शायद सब ठीक हो...
और अगर ना भी हुआ...
तुम फिर भी ठीक रहोगी।
तो आज...
बस साँस लो।
आसमान देखो।
और खुद से कहो...
"मैं अपनी ज़िंदगी
जल्दी में नहीं जीऊँगी..."
क्यों इतना सोचती हो...
थोड़ा सा जी भी लो...