माता रामकंवरी का नाग देवता से प्रत्यक्ष संवाद का वर्णन। बालू भाई वसुनिया भामल Balu vasuniya
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मुकेश डामर सेमलिया मुकेश डामर सेमलिया
मुकेश मुकेश मुकेश
तेजाजी महाराज की माता रामकुंवरी और नाग देवता के बीच संवाद के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह माना जाता है कि रामकुंवरी को नाग देवता के आशीर्वाद से पुत्र की प्राप्ति हुई थी। जब तेजाजी का जन्म हुआ, तो उनकी आभा और चेहरे के तेज को देखते हुए उनका नाम तेजा रखा गया था।
तेजाजी के जन्म और नाग देवता की भूमिका
तेजाजी का जन्म विक्रम संवत 1130 में माघ सुदी शुक्ल पक्ष चौदस को हुआ था।
उनकी माता रामकुंवरी भगवान शिव के उपासक थे और नाग देवता के आशीर्वाद से पुत्र की प्राप्ति हुई थी।
तेजाजी के पिता ताहड़ देव भी भगवान शिव के उपासक थे.
नाग देवता का आशीर्वाद
बाद में जब तेजाजी ने एक सर्प को वचन दिया और उसे निभाया, तो सर्प ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि भविष्य में जो भी व्यक्ति या पशु उनके नाम का धागा (तांती) बाँधेगा, उस पर साँप का विष असर नहीं करेगा। इस तरह, तेजाजी को नागों के देवता के रूप में पूजा जाने लगा
तेजाजी महाराज की माता रामकुंवरी और नाग देवता के बीच संवाद के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह माना जाता है कि रामकुंवरी को नाग देवता के आशीर्वाद से पुत्र की प्राप्ति हुई थी। जब तेजाजी का जन्म हुआ, तो उनकी आभा और चेहरे के तेज को देखते हुए उनका नाम तेजा रखा गया था।
तेजाजी के जन्म और नाग देवता की भूमिका
तेजाजी का जन्म विक्रम संवत 1130 में माघ सुदी शुक्ल पक्ष चौदस को हुआ था।
उनकी माता रामकुंवरी भगवान शिव के उपासक थे और नाग देवता के आशीर्वाद से पुत्र की प्राप्ति हुई थी।
तेजाजी के पिता ताहड़ देव भी भगवान शिव के उपासक थे.
नाग देवता का आशीर्वाद
बाद में जब तेजाजी ने एक सर्प को वचन दिया और उसे निभाया, तो सर्प ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि भविष्य में जो भी व्यक्ति या पशु उनके नाम का धागा (तांती) बाँधेगा, उस पर साँप का विष असर नहीं करेगा। इस तरह, तेजाजी को नागों के देवता के रूप में पूजा जाने लगा
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Mukesh Damar
From - Semliya Khawasa Madhya pradesh ( india ) #mukeshdamar