Khamma Ghani|Jain Diksha Song|Mumukshu Honey Kumari|Manan Sanghvi
Nemi Kanti Mani
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Khamma Ghani|Jain Diksha Song|Mumukshu Honey Kumari|Manan Sanghvi
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Nemi Kanti Mani
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🤩 🎶New Song Khamma Ghani 🎶🤩
Mumukshu Honey Kumari की भागवती दीक्षा के उपलक्ष में 💫
Lyrics : Jayshree Ben Kothari
Singer : Manan Sanghvi
Music : Manan Shah
Cinematography : Chhabikruti
Graphics : Shankheshwar Studios
Lyrics :
जे नगर महीं, हे वैरागी तारी गूँजती रही,
विरती सितारी ,ए नगर महीं,
तू संचरे ।
जे नगर हवे, छे सहारो तारो,
जे नगर हवे, जय करावे तारो,
ए नगर महीं, तू संचरे ।
वैराग थी महेक तो रे, पंथ तू धरे,
चिंतामणि रत्न समूं, रजोहरण मळे,
खम्मा घणी, खम्मा घणी,
वैरागी ने, खम्मा घणी।
वीरनी बनी, वीरनी बनी,
वैरागी तो, वीरनी बनी,
वीरनी बनी।
जे नगर महीं, हे वैरागी तारी गूँजती रही,
विरती सितारी,ए नगर महीं,
तू संचरे।
स्वर्ण समूं छे साधु जीवन,
आराधना नूं छे उपवन,
गुरुकुल वासे मोयु रे मन,
तने निरखीने, लोको कहेता बधा,
श्रेष्ठ कहायु, रजो हरण,
सुरा-असुरों पण करता नमन,
जिन रंगमां तारु रंगायु मन,
तने त्यागी वैरागी केहता बधा।
जे नगर महीं, वसे व्रतधारी,
जे नगर महीं, संतोनी सवारी,
ए नगर महीं, तू संचरे ।
वैराग थी महेक तो रे, पंथ तू धरे
चिंतामणी रत्न समूं, रजोहरण मळे,
खम्मा घणी, खम्मा घणी,
वैरागी ने, खम्मा घणी।
वीरनी बनी, वीरनी बनी,
वैरागी तो, वीरनी बनी,
वीरनी बनी।
जे नगर महीं, हे वैरागी तारी गूँजती रही,
विरती सितारी,ए नगर महीं
तू संचरे ।
आतम घटमां तू रमती रहे,
जिनवर्नी आणामां वहती रहे,
शास्त्र सुलोचन धरती रहे,
तारा जीवनने धन धन कहता बधा,
हर्षित थया छे तारा नयन,
सार्थक थयो छे आजे जनम,
मुक्तिना पंथे भरिया चरण,
तने अंतरथी आशिष देता बधा।
जे नगर हवे, छे सहारो तारो,
जे नगर हवे, जय करावे तारो,
ए नगर महीं, तू संचरे ।
वैराग थी महेक तो रे, पंथ तू धरे,
चिंतामणी रत्न समूं, रजोहरण मळे,
खम्मा घणी, खम्मा घणी,
वैरागी ने, खम्मा घणी।
वीरनी बनी, वीरनी बनी,
आजे हनी, वीरनी बनी,
वीरनी बनी।
जे नगर महीं, हे वैरागी तारी गूँजती रही,
विरती सितारी ,ए नगर महीं,
तू संचरे ।
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