सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन 3 कार्य जरूर कीजिये अपने पितरों की प्रसन्नता के लिए,पितर दोष कैसे
Aacharya Guruji
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सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन 3 कार्य जरूर कीजिये अपने पितरों की प्रसन्नता के लिए,पितर दोष कैसे
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🌺 स्नान • दान • श्राद्ध • तर्पण 🌺
॥ सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या 2026 ॥
दिनांक : 10 अक्टूबर 2026, शनिवार
आश्विन कृष्ण अमावस्या • महालया अमावस्या • विसर्जनी अमावस्या
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहा जाता है। यह पितृपक्ष की अंतिम एवं अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है। इस दिन ज्ञात-अज्ञात, भूले-बिसरे तथा जिन पितरों की पुण्यतिथि ज्ञात न हो, उन सभी के निमित्त श्रद्धापूर्वक श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान एवं दान-पुण्य करने का विशेष महत्व माना गया है।
🪷 अमावस्या तिथि
अमावस्या तिथि का प्रारंभ — 9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार रात्रि 9:36 बजे
अमावस्या तिथि की समाप्ति — 10 अक्टूबर 2026, शनिवार रात्रि 9:20 बजे
अतः उदया एवं मध्याह्नव्यापिनी तिथि के अनुसार 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या मनाई जाएगी।
🕉️ श्राद्ध-तर्पण का विशेष समय
प्रातः 11:10 बजे से दोपहर 3:58 बजे तक
श्राद्ध कर्म के लिए मध्याह्न काल विशेष प्रशस्त माना गया है। इस अवधि में पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन एवं दान-दक्षिणा की जा सकती है।
🌿 सर्वपितृ अमावस्या का महत्व
यदि किसी कारणवश पितृपक्ष में अपने पूर्वजों का श्राद्ध उनकी निर्धारित तिथि पर न कर पाए हों अथवा उनकी पुण्यतिथि ज्ञात न हो, तो सर्वपितृ अमावस्या पर उनका श्राद्ध किया जा सकता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए पितृकर्म से पितर तृप्त होकर अपने वंशजों को सुख, शांति, आरोग्य, समृद्धि एवं मंगल का आशीर्वाद प्रदान करते हैं और पितृलोक की ओर प्रस्थान करते हैं।
🙏 इस दिन क्या करें?
प्रातः स्नान कर स्वच्छ श्वेत अथवा पीले वस्त्र धारण करें। कुश की पवित्री धारण कर ज्ञात-अज्ञात पितरों का स्मरण करते हुए जल, काले तिल, कुश एवं पुष्प से तर्पण करें।
पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक भोजन बनाकर उसका अंश गौमाता, कौए, श्वान एवं अन्य जीवों के लिए निकालें। सामर्थ्यानुसार ब्राह्मण भोजन कराकर वस्त्र, अन्न, फल, पात्र अथवा धन का दान तथा दक्षिणा प्रदान करें।
श्रद्धा ही श्राद्ध का मूल है। अतः कर्मकांड के साथ अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, स्मरण और सम्मान का भाव अवश्य रखें।
🌺 पितरों की भावपूर्ण विदाई
पितृपक्ष में अपने वंशजों से श्रद्धा और तर्पण की अपेक्षा से आए पितरों की सर्वपितृ अमावस्या पर भावपूर्ण विदाई मानी जाती है। इसलिए इस दिन अपने कुल के सभी दिवंगत पूर्वजों का स्मरण कर जलांजलि अर्पित करें और उनसे परिवार की सुख-शांति एवं कल्याण का आशीर्वाद प्राप्त करें।
॥ पितृ देवो भवः ॥
॥ ॐ पितृभ्यो नमः ॥
आचार्य धर्मेन्द्र शास्त्री
यज्ञाचार्य • ज्योतिषाचार्य • वास्तुविद
उज्जैन
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सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन 3 कार्य जरूर कीजिये अपने पितरों की प्रसन्नता के लिए,पितर दोष कैसे
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