मणिमहेश पर्वत पर देखें चमत्कार // Manimahesh Parvat
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आदि-अनादि देव भगवान शिव का निवास स्थान वैसे तो कैलाश पर्वत है, लेकिन संसार में ऐसे कई स्थान हैं जहां भगवान शिव के साक्षात होने के प्रमाण मिलते हैं। उन्हीं में से एक है मणिमहेश। जी हां, मणिमहेश हिमाचल प्रदेश में चंबा जिले के भारमोर उपसंभाग में स्थित 13390 फुट की उंचाई वाला एक रहस्यमयी पर्वत है। हिमालय की पीर पंजाल पर्वत श्रंखला में मौजूद मणिमहेश पर्वत भगवान शिव का दूसरा घर कहा गया है। हर साल सैकड़ों हिंदू धर्वावलंबी मणिमहेश यात्रा करते हैं। मणिमहेश पर्वत के नीचे एक झील भी है जिसे मणिमहेश झील कहा जाता है। इस झील में स्नान करने से करोड़ों जन्मों के पापों का नाश हो जाता है।
कहा जाता है देवी पार्वती से विवाह के बाद शिवजी ने मणिमहेश पर्वत का निर्माण किया था और काफी समय तक शिव-पार्वती ने इस पर्वत पर निवास किया था। इस पर्वत का नाम मणिमहेश इसलिए पड़ा क्योंकि जब प्रातःकाल सूर्याेदय होता है तब इस चोटी पर सूर्य का प्रकाश एक मणि की तरह फैलता है, जिसे देखने के लिए लोग रात्रि में ही यहां पहुंच जाते हैं। इस वीडियो में आगे मैं बताउंगा कैसे मणिमहेश पर्वत के पीछे से सूर्योदय होता है और चमकीली मणि का आकार बनता है।
क्यों रहस्यमयी है यह पर्वत
यह पर्वत रहस्यमयी इसलिए कहा गया है क्योंकि कैलाश की तरह इस पर भी आजतक कोई नहीं चढ़ पाया है। कहा जाता है जिसने भी इस पर चढ़न्े की कोशिश की वह पत्थर का बन गया। एक तिब्बती नागरिक ने मणिमहेश पर्वत पर चढ़ने का प्रयास किया लेकिन वह वापस लौटकर नहीं आया। उसके बाद एक चरवाहे ने अपनी बकरियों के साथ इस पर्वत पर जाने का प्रयास किया लेकिन वह भी बकरियों समेत पत्थर का बन गया। इस पर्वत की सैटेलाइट इमेज में इस तरह की पत्थर की आकृतियां नजर आ चुकी हैं, जैसे वे किसी इंसान और जानवरों की पत्थर की मूर्तियां हों।
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