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🌙 नात-ए-पाक ﷺ — **“बस एक नज़र-ए-करम चाहिए”**बस एक नज़र-ए-करम चाहिए,मेरे आका ﷺ,

Madina -e-Islam

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🌙 नात-ए-पाक ﷺ — **“बस एक नज़र-ए-करम चाहिए”**बस एक नज़र-ए-करम चाहिए,मेरे आका ﷺ,

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Madina -e-Islam
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🌙 नात-ए-पाक ﷺ — *“बस एक नज़र-ए-करम चाहिए”* बस एक नज़र-ए-करम चाहिए, मेरे आका ﷺ, मुझे क्या और चाहिए। दिल में आपकी मोहब्बत रहे हर घड़ी, इससे बढ़कर मुझे क्या खुशी चाहिए। जब भी दुनिया के ग़म सताने लगे, आपका नाम दिल को सुकून दे। टूट जाए अगर हौसला मेरा कभी, आपकी याद फिर से जुनून दे। *या मुस्तफ़ा ﷺ, या मुज्तबा ﷺ,* मेरी साँसों में आपका नाम रहे। मेरी आँखों में मदीना बसा रहे, मेरे दिल में आपका पैग़ाम रहे। एक अरमान दिल में छुपा है मेरे, मुझको मदीने की गलियाँ मिलें। हरी जाली के साए में रोता रहूँ, और लब पर दरूदों के फूल खिलें।