मां के जीवन में बेटा बनकर कौन आता है,गरुड़ पुराण में इसका क्या रहस्य है #viralvideo #garudpuran
Peaceful safar
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गरुड़ पुराण और सनातन धर्म के ग्रंथों में कर्मों के सिद्धांत (Theory of Karma) और पुनर्जन्म के आधार पर यह बताया गया है कि हमारे जीवन में आने वाला हर रिश्ता पिछले जन्मों के लेन-देन से जुड़ा होता है।
मां के जीवन में बेटा बनकर कौन आता है, इसके बारे में गरुड़ पुराण में 4 मुख्य स्थितियां बताई गई हैं:
1. सेवक या कर्ज चुकाने वाला आत्मा (सेवक पुत्र)
यदि पिछले जन्म में किसी व्यक्ति ने किसी से कर्ज लिया हो या किसी की सेवा का लाभ उठाया हो और उसे चुकाए बिना ही उसकी मृत्यु हो गई हो, तो वह कर्ज चुकाने के लिए अगले जन्म में उस व्यक्ति के घर बेटा बनकर जन्म लेता है। ऐसा बेटा माता-पिता की बहुत सेवा करता है, आज्ञाकारी होता है और उन्हें हर सुख देता है।
2. शत्रु या बदला लेने वाला आत्मा (शत्रु पुत्र)
यदि किसी व्यक्ति का पिछले जन्म में किसी के साथ घोर वैर (दुश्मनी) रहा हो, किसी ने किसी को धोखा दिया हो या नुकसान पहुँचाया हो, तो वह आत्मा बदला लेने के लिए बेटे के रूप में जन्म ले सकती है। ऐसा पुत्र बड़ा होकर माता-पिता को मानसिक, आर्थिक या शारीरिक कष्ट देता है, घर में कलह पैदा करता है और माता-पिता को हमेशा दुखी रखता है।
3. उदासीन या तटस्थ आत्मा (उदासीन पुत्र)
यह वह आत्मा होती है जिसका माता-पिता के साथ पिछले जन्म में न तो बहुत गहरा प्रेम था और न ही कोई दुश्मनी। ऐसी आत्मा सिर्फ अपना बचा-कुचा प्रारब्ध (कर्म) पूरा करने आती है। ऐसा बेटा न तो माता-पिता को कोई खास कष्ट देता है और न ही उनसे बहुत ज्यादा लगाव रखता है। शादी होने के बाद या कमाने के बाद ऐसे बच्चे अक्सर माता-पिता से अलग हो जाते हैं और अपनी दुनिया में मस्त रहते हैं।
4. पूर्व जन्म का कोई प्रिय या ऋणी (आर्थिक और भावुक संबंध)
अगर पिछले जन्म में आपने किसी की निस्वार्थ भाव से मदद की थी या किसी का आपके ऊपर कोई भावनात्मक कर्ज था, तो वह आत्मा आपके प्रति कृतज्ञता (Gratitude) व्यक्त करने या अपना प्रेम वापस लौटाने के लिए बेटे के रूप में आती है। ऐसा पुत्र परिवार का नाम रोशन करता है और माता-पिता के लिए भाग्यशाली साबित होता है।
निष्कर्ष: गरुड़ पुराण के अनुसार, कोई भी जीव बिना किसी कारण या बिना किसी कर्म बंधन के किसी की कोख से जन्म नहीं लेता। माता-पिता और संतान का रिश्ता पिछले जन्मों के 'ऋणानुबंध' (कर्मों के हिसाब-किताब) का ही परिणाम होता है।