Перейти к содержимому

सामान्य वर्गों के प्रति मोदी जी की क्रूरता | ऐसे बदला सुप्रीम कोर्ट का फैसला ##SCSTAct2018 #modi

Anup Kumar Official

0:00 / 0:00

सामान्य वर्गों के प्रति मोदी जी की क्रूरता | ऐसे बदला सुप्रीम कोर्ट का फैसला ##SCSTAct2018 #modi

19 379 просмотров · 10 дней назад
Anup Kumar Official
1,33 тыс. подписчиков
19 379 просмотров · 10 дней назад
20 मार्च 2018: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SC/ST एक्ट के तहत दर्ज होने वाले झूठे मुकदमों से निर्दोषों और सरकारी कर्मचारियों की रक्षा करना जरूरी है। कोर्ट ने तीन बड़े दिशा-निर्देश जारी किए: नो ऑटोमैटिक अरेस्ट (तुरंत गिरफ्तारी पर रोक): SC/ST एक्ट में शिकायत दर्ज होते ही आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी। प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry): प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने से पहले DSP स्तर का अधिकारी 7 दिनों के भीतर यह जांच करेगा कि शिकायत फर्जी या दुर्भावनापूर्ण तो नहीं है। अनुमति और अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail): सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी के लिए उसके नियुक्ति अधिकारी (Appointing Authority) और आम नागरिक की गिरफ्तारी के लिए जिले के SSP की लिखित अनुमति अनिवार्य होगी। इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि अगर शिकायत प्रथम दृष्टया झूठी लगती है, तो जज अग्रिम जमानत दे सकते हैं। Modi reversed this SC decision in Parliament.