कुकरा बासत आगे सगा पहुना II Sua Geet II सुआ गीत II Champa Nishad
Kaushal Patel
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कुकरा बासत आगे सगा पहुना II Sua Geet II सुआ गीत II Champa Nishad
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Kaushal Patel
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हमारे बहनों द्वारा एक छोटा सा प्रयास
स्वर - चम्पा निषाद दीदी
डांसग्रुप - कौशिल्या पटेल , मोहनी पटेल , भगवती छेदावी , हंसमनी पटेल , देविका पटेल
About - सुवा नृत्य (सुआ नृत्य) छत्तीसगढ़ राज्य का एक अत्यंत प्रसिद्ध और पारम्परिक लोक नृत्य है। यह मुख्य रूप से महिलाओं और युवतियों द्वारा समूहों में किया जाने वाला एक सांस्कृतिक नृत्य है।
इस नृत्य का विवरण निम्नलिखित है:
1. नाम और अर्थ'सुवा' या 'सुआ' का अर्थ 'तोता' (Parrot) होता है। भारतीय संस्कृति में तोते को संदेशवाहक माना गया है। इस नृत्य में स्त्रियाँ तोते को माध्यम बनाकर अपने मन की भावनाओं, खुशियों, व्यथा और विरह-वेदना को व्यक्त करती हैं।
2. आयोजन का समयसुवा नृत्य का आयोजन मुख्य रूप से दीपावली के पर्व के आसपास (शरद पूर्णिमा या दशहरे से लेकर दीपावली और अगहन मास तक) किया जाता है। यह समय धान की फसल पकने और कटाई का भी होता है।
3. नृत्य की विधिप्रतीक स्थापना: एक बाँस की टोकरी में नया धान भरा जाता है और उसमें मिट्टी से बना सुआ (तोता) रखा जाता है, जिसे हरे कपड़े और धान की मंजरियों से सजाया जाता है। कहीं-कहीं मिट्टी के भगवान शिव और पार्वती (गौरा-गौरी) की प्रतिमाएं भी रखी जाती हैं। नृत्य शैली: महिलाएँ इस टोकरी को बीच में रखकर चारों ओर वृत्ताकार (Circular formation) घेरा बनाकर खड़ी होती हैं। वे झुककर, तालियाँ बजाते हुए और लयबद्ध कदम ताल करते हुए नृत्य करती हैं।
4. सुवा गीत एवं संगीतसुवा नृत्य की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी भी वाद्ययंत्र का प्रयोग नहीं होता। नृत्य की ताल केवल तालियों की गूँज और नर्तकियों के पैरों की चाप से बनती है।गीतों की शुरुआत अक्सर "तरी नरी नहा नरी नहा नरी ना ना रे सुअना..." जैसी पारम्परिक पंक्तियों से होती है।
5. सामाजिक और सांस्कृतिक महत्वयह नृत्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, ग्रामीण जीवन की सरलता और नारी मन की संवेदनाओं का प्रतीक है। महिलाएँ घर-घर जाकर यह नृत्य करती हैं और गृहस्वामिनी उन्हें उपहार स्वरूप धान, चावल या उपहार देती है। Suwa Dance Overviewयह वीडियो छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध सुवा नृत्य की परंपरा और संस्कृति की झलक प्रस्तुत करता है।