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तूने हरसिंगार हिलाकर बुरा किया,पाँवों की सारी ज़मीं को, गुलों ने ढंक लिया

Joon (दिल की धुन)

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तूने हरसिंगार हिलाकर बुरा किया,पाँवों की सारी ज़मीं को, गुलों ने ढंक लिया

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Joon (दिल की धुन)
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तूने हरसिंगार हिलाकर बुरा किया, पाँवों की सारी ज़मीं को, गुलों ने ढंक लिया। तूने हरसिंगार हिलाकर बुरा किया, पाँवों की सारी ज़मीं को, गुलों ने ढंक लिया। हर फूल में तेरी ही सूरत नज़र पड़ी, भरी बज़्म में भी तूने मुझे तन्हा ही किया। तूने हरसिंगार हिलाकर बुरा किया, पाँवों की सारी ज़मीं को, गुलों ने ढंक लिया। तेरी हँसी जो ठहरी, मौसम ठहर गया, सूने से मेरे दिल में, सावन उतर गया। लब चुप रहे मगर, आँखें सब कह गईं, एक पल की बात थी, उम्र भर रह गई। तूने हरसिंगार हिलाकर बुरा किया, पाँवों की सारी ज़मीं को, गुलों ने ढंक लिया। रात जुदाई की थी, तू याद आ गया, बुझते चराग़ को फिर से जला गया। चाँद से पूछा मैंने, "कहाँ है वो मेरा?" वो भी मेरी तरह रात-भर जगा किया। तूने हरसिंगार हिलाकर बुरा किया, पाँवों की सारी ज़मीं को, गुलों ने ढंक लिया। तू दूर है तो क्या, रूह में तो है, मेरी हर दुआ, हर जुस्तजू में तो है। तू सामने हो फिर भी, दूरी अजीब है, मिलकर भी मिलने की चाहत क़रीब है। शाख़ों से टूटे फूल भी, हमदम बने मेरे, हर पंखुड़ी में तेरी महक ढूँढा किया। कहता 'अमीन' हर सितम के बाद भी, हमने तो बस तुझी को दुआ किया। तूने हरसिंगार हिलाकर बुरा किया, पाँवों की सारी ज़मीं को, गुलों ने ढंक लिया। अब हर बहार में तेरा ही गुमाँ किया, तूने मेरी रूह को अपना मुंतज़िर किया। तूने हरसिंगार हिलाकर बुरा किया, पाँवों की सारी ज़मीं को, गुलों ने ढंक लिया। तूने हरसिंगार हिलाकर बुरा किया, पाँवों की सारी ज़मीं को, गुलों ने ढंक लिया। गुलों ने ढंक लिया।