Ho Deenanath Chath Geet Harmonium Tutorial of Maithili Thakur || छठ गीत हारमोनियम ट्यूटोरियल ||
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Ho Deenanath Chath Geet Harmonium Tutorial of Maithili Thakur || छठ गीत हारमोनियम ट्यूटोरियल ||
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बहुत ही आसान हिन्दी नोटैशन, ऐसा नोटैशन आप पहले कभी नहीं देखे होंगे। एक बार इस विडिओ को अवश्य देखिए।
जिस गाने को सुनकर नोटैशन बनाया गया है उसका लिंक नीचे दिया गया है।
• Sona Satkuniya Ho Dinanaath (Chhath Geet) ...
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Note
अगर आप भी हारमोनियम, गिटार, बाँसुरी, पियानो इत्यादि बजाना सीखना चाहते हैं
या फिर आप बहुत पहले से सीख रहे हैं लेकिन गाने में परेशानी होती है
साथ ही साथ कोई भी गाना खुद से बिना नोटेशन देखे नहीं बजा पाते हैं|
और हां ताल के साथ तो बजा ही नहीं पाते हैं
अगर आप बहुत सारे अलंकार बजा कर परेशान हो चुके हैं
अगर मन में डर बन गया है कि में तो बहुत समय दिया लेकिन अब लगता है की इसे सीखना काफी कठिन है
तो स्मार्ट म्यूजिक के ऑनलाइन क्लास में इन सारी परेशानियों का समाधान हैं
और हाँ सीखने की कोई उम्र सीमा नहीं है | किसी भी उम्र के लोग इसे सीख सकते हैं |
Contact Number : 9934486216 पर कॉल करें
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Disclaimer
मेरे प्रिय सब्स्क्राइबर और मेम्बर्स,
मेरे सारे गाने का नोटेशन हारमोनियम के पहले काले परदे अर्थात Button को ‘सा’ अथवा ‘षड़ज’ मानकर बनाया जाता है। मेरा चैनल ऐसा कुछ भी दावा नहीं करता है कि कोई भी गाना किस राग या किस थाट पर आधारित है। मेरे विडिओ का एकमात्र मकसद यह होता है कि जिन लोगों को संगीत का ज्यादा ज्ञान नहीं है और वो गाने को अपने वाद्ययंत्र पर बजाना चाहते हैं सिर्फ उनकी सहायता करना है। मुझे यह पूरी तरह से ज्ञात है की किसी भी गाने को बजाने के लिए हमेशा हारमोनियम के पहले काले बटन को ‘सा’ नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि उस गाने के स्केल, राग या थाट के आधार पर उस गाने का ‘सा’ अथवा ‘षड़ज’ का निर्धारण होना चाहिए। लेकिन मेरे विडिओ में ऐसा नहीं है। मेरे विडिओ में हमेशा हारमोनियम के पहले काले परदे अर्थात Button को ‘सा’ अथवा ‘षड़ज’ माना जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है कि जितने भी नए विद्यार्थी संगीत के होते हैं वे सभी पहली बार इसी पहले काले बटन को ‘सा’ मानकर ‘सरगम’ ‘अलंकार’ या ‘राग’ का अभ्यास करते हैं। और इस क्रम में वे इसी ‘सा’ और अन्य स्वर को पूरी तरह से याद कर लेते हैं और इसके अभ्यस्त हो चुके होते हैं। ऐसे में अब फिर से उन्हे अगर ‘सा’ किसी अन्य बटन को मानना पड़े तो फिर से सभी बटन का नया नाम सीखना उनके लिए कठिन होता है। हाँ जो लोग संगीत का ज्ञान रखते हैं उनके लिए यह एकदम से छोटी बात होती है। अब इसी पहले काले बटन को ‘सा’ मानने के कारण राग के आधार पर स्वरों के नाम आप नहीं देख पाते हैं। जैसे की अगर कोई गाना किसी ऐसे राग पर आधारित है जिसमें कोमल स्वरों का प्रयोग हुआ है लेकिन मेरे विडिओ के नोटेशन में वह स्वर शुद्ध दिखाई देता है तो वह सिर्फ इस कारण से के मैंने ‘सा’ का स्थान हारमोनियम के पहले काले बटन को माना है। अगर किसी गाने में कोमल स्वर लगा होता है, वास्तव में वह स्वर कोमल ही बज रहा होता है। तभी तो वह गाना बज जाता है। अगर कोमल स्वर नहीं लगता तो गाना कैसे बजता? लेकिन नोटेशन में स्वरों के नाम आसानी के लिए ऐसा लिखा होता है। जिससे नए विधार्थी बिना किसी परेशानी तुरंत उस स्वर तक अपनी उंगलियों को रख पाते हैं।
एक और बात मेरे विडिओ का आधार शास्त्रीय संगीत न होकर वेस्टर्न स्केल है। मेरे विडिओ वेस्टर्न स्केल को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। और हारमोनियम के पहले काले परदे अर्थात Button को ‘सा’ अथवा ‘षड़ज’ मानने के बाद जिन स्वरों का जो नाम बनता है उसे ही नोटेशन में लिख दिया जाता है।
अंततः यकीन मानिए विडिओ के कमेन्ट को पढ़कर आप समझ सकते हैं कि कितने लोगों ने इस कोशिश को सराहा है। लोगों ने साफ लिखा है कि बार-बार स्वरों का स्थान बदलने से बहुत परेशानी होती है। कोई बटन किसी गाने में ‘म’ अर्थात ‘मध्यम’ है तो वही बटन फिर से किसी गाने में ‘प’ अर्थात ‘पंचम’ हो जाता है। तो यह कोशिश उन्ही लोगों के लिए है जिनके लिए स्वरों का स्थान बार बार बदलना कठिन होता है।
और हाँ जो लोग संगीत का ज्ञान रखते हैं वे इस बात को आसानी से समझ जाएंगे कि स्वरों का नाम ऐसा किसलिए हुआ है।