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Sikh Conversion in Punjab, FULL INVESTIGATION. | पंजाब और ईसाई मिशनरीज़

Coffee With Sumeet Jain

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Sikh Conversion in Punjab, FULL INVESTIGATION. | पंजाब और ईसाई मिशनरीज़

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पंजाब में क्राइस्ट गुरुद्वारा पंजाब और ईसाई मिशनरीज़ पंजाब में क्राइस्ट गुरुद्वारा | पंजाब और ईसाई मिशनरीज़ | आखिर कौन जमात है ये क्रिप्टो क्रिश्चियन #sumitjain #sumeetjain #kisaanandolan #modi #india #bharat #indiashinning #worldorder #China #pakistanreaction #pakistanmediacrying #pakistanfunnyreaction #pakistanarmyfails #ttp #bla #balochistan #pok #boycottcongress #rahulgandi #poledancersonia #geopolitics #currentaffairs #currentissue #rahulgandhi #congressmuktbharat हालाँकि पूरे देश में religious conversion का कैन्सर तो ग़ुलामी के समय ही फैल चुका था लेकिन देश के कुछ हिस्से इससे अछूते रहे थे , जिनमे पंजाब भी एक था जहाँ ईसाईयों का %  प्रतिशत बहुत कम था। sikh church sikh church sikh church near me sikh church name sikh church called sikhism church near me is sikh a religion sikh religion rules can a sikh get married in a church sikh religion questions and answers what god do sikh worship sikh church in punjab sikh conversion to christianity in punjab sikh converts to christianity in punjab sikh caste in punjab richest sikh in punjab what is the main religion in punjab X पंजाब में यह काम मुश्किल इसलिए था क्योंकि वह लोग अपनी अगाध श्रद्धा और गुरु गोविंद साहब के त्याग को याद रखते थे। लोग गँवार थे , पढ़े लिखे भी थे,  लेकिन मेहनत कश और धार्मिक थे ..जब आर्थिक dikkat  नहीं और शारीरिक दुर्बलता नहीं होती है तब तक धर्म से डिगता नहीं व्यक्ति, इसलिए उनका आर्थिक रूप और शारीरिक रूप से दुर्बल होना ज़रूरी था , और उनको हिंदुओ से दूर करके,  isolated पृथक धर्म manvaya gaya. क्योंकि सिख हमेशा से ख़ुद को हिंदुत्व का अभिन्न अंग मानते थे। साथ ही किसी छोटे व्यक्ति द्वारा अगर मत परिवर्तन कर भी लिया जाता , तो उसे समाज और परिवार से बहिष्कृत कर दिया जाता था, इसलिए चर्च ने कुछ बड़े व्यक्तियों का चुनाव किया जो इस काम के लिए उपयुक्त हों ताकि उनकी आड़ में बाक़ियों को भी कन्वर्ट किया जा सके। 1980 के दशक में यह काम अपनी गति पकड़ा जब चर्च को वह उपयुक्त व्यक्ति मिला जिसका नाम था हरभजन सिंह... वह एक लम्बी चौड़ी ज़मीन के मालिक थे , साथ ही बड़े किसान भी। 1984 के सिख नरसंहार ने सिखों को हिंदुओ से तोड़ने में भारी मदद की जो कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुआ था ..सिख पूरी तरह हिंदुओ से कट गए और चुटकुलों में समा गए। 1986 में हरभजन सिंह Christian  मशीही मत को अपनाकर ईसाई बन गए। उन्होंने 1991 में अपने खेत में एक बड़े चर्च का निर्माण करवाया और चर्च सभा का आयोजन प्रारम्भ किया। अपने कन्वर्ज़न का कारण हरभजन सिंह ने बताया कि वह सिख धर्म में रहकर नशे और बुरी आदतों का शिकार हो गए थे जिससे निकलने में नाकामयाब रहे, लेकिन ईसाई बनने के बाद वह बिलकुल सब छोड़ देने में सफल रहे और मानसिक शांति का अनुभव कर रहे हैं। उसके बाद कन्वर्ज़न का असली खेल सुरु हुआ.. चर्च द्वारा पोषित हरभजन सिंह और और चर्च की टीम ने मिलकर तरह तरह के खोज की , जिससे लोगों को अधिक से अधिक कन्वर्ट कर सकें। उस समय चर्च द्वारा सिखों के प्रतीकों और गुरुओं की काफ़ी सारी चीज़ों को उसी नाम से अपना कर ईसाई बनने की छूट दी गई, इस ग्रूप द्वारा सुझाया गया कुछ कन्वर्ज़न के मुख्य उपाय इस प्रकार हैं। चर्च में काम करने वाले सभी लोगों को पंजाबी अच्छे से सिख लेनी चाहिए ताकि वह संवाद स्थापित कर सकें लोगों में। चर्च को चर्च न कहकर क्राइस्ट गुरुद्वारा कहा जाए ताकि लोगों का झुकाव बना रहे। चर्च के पास्टर या प्रीस्ट को इन नामो से न बुलाकर GRANTI या GIANI (ज्ञानी ) कहा जाए जैसा की सिखों की परम्परा है। और जो बिलीवर beleiver  (श्रद्धालु ) हैं उनको इशा दा सिख कहा जाए। why this was done. इशू को सतनाम की जगह स्थापित करना,  और साथ ही वाहे गुरु को सम्बोधन को अडैप्ट किया gaya,   क्योंकि इशु ही सत गुरु हैं ऐसा स्थापित हो जाएगा। इन सब उपायों पर अमल करने के साथ ही drugs lobby  ड्रग्स लॉबी को बढ़ावा diya gaya,   ताकि लोग नशे के वश में हो जाए। चर्च का ड्रग्स के व्यापारियों को संरक्षण किसी से छुपा हुआ नहीं है पंजाब में, ऐसा करने से राजनैतिक लोगों में पकड़ स्थापित की गई और उसके बदले उनको ड्रग्स के लिए सपोर्ट किया गया। चंगाई changai sabha सभा का आयोजन चर्च की कन्वर्ज़न नीति का अहम हिस्सा है। वह अनपढ़ लोगों के बीच सबसे कारगर टूल साबित हुआ...  संडे चर्च का आयोजन शुरू हुआ। साथ ही सिखों की भजन करने की रीति को ध्यान में रखकर चर्च ने भजन संध्या को भी अपनाया, पैसा उनका सबसे कारगर टूल है ही। इस प्रकार पिछले पंद्रह सालों में अधिकतम कन्वर्ज़न हुआ जो uninterrupted भी जारी है, राजनीतिक संरक्षण में ख़ूब फल फूल रहा है। आज पंजाब पूरी तरह चर्च की गिरफ़्त में है। इस समय नया टूल प्रैक्टिस में लाया गया है, लेडीज़ पास्टर का, जो कि चर्च के नियमो के विरुद्ध है, लेकिन वह औरतों की भीड़ जमा करने में कारगर है। चंगाई सभा आज लेडीज़ पास्टर ही आयोजित करती हैं। जल्द ही पंजाब पूरी तरह चर्च के अधीन होकर रह जाएगा, अगर ऐसा ही चलता रहा। नोट: पोस्ट ग़ैर राजनैतिक है, कृपया किसी तरह की राजनैतिक कुंठा में टिप्पणी न करें, यह सिर्फ़ आम जनमानस की जागृति के लिए लिखी गई है। Join me on this journey to gain a better understanding of India’s unique position in the world’s economic and political landscape, and learn how to navigate and thrive in this ever-changing environment. Don’t forget to hit that subscribe button and ring the notification bell to stay updated with all the latest insights! EMAIL: Coffeewithsumeetjain@gmail.com TWITTER: @SUMEETMOUNTAIN AND @SUMEETJAINCHINA TELEGRAM GROUP https://t.me/coffeewithsumeetjain #Sumeetjain #sumitjain