दुख है, पर ये दुख ही दूरी मिटाएगा || आचार्य प्रशांत, आचार्य नागार्जुन पर (2024)
शास्त्रज्ञान
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दुख है, पर ये दुख ही दूरी मिटाएगा || आचार्य प्रशांत, आचार्य नागार्जुन पर (2024)
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वीडियो जानकारी: 27.03.24 , बोध प्रत्यूषा , ग्रेटर नॉएडा
Title : दुख है, पर ये दुख ही दूरी मिटाएगा || आचार्य प्रशांत, आचार्य नागार्जुन पर (2024)
📋 Video Chapters
0:00 – Intro
0:03 – ज्ञान का औचित्य और सत्य की खोज
10:01 – हम मजबूर क्यों हो जाते हैं?
17:33 – संसार हमारी लिखाई है
22:48 – "विवशता" जैसा शब्द अध्यात्म में नहीं है
29:44 – जो स्वयं आश्रित है, वो उत्पन्न नहीं कर सकता
40:14 – बोध ही मुक्ति है
47:58 – बंधन को जान लेना है
57:18 – भजन
1:00:06 – समापन
विवरण:
इस वीडियो में आचार्य जी ने मानव जीवन में दुख और उसके कारणों पर गहन चर्चा की है। उन्होंने बताया कि दुख का अनुभव मनुष्य के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह विभिन्न रूपों में प्रकट होता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे जीवन में जो भी ज्ञान या शिक्षा है, उसका उद्देश्य दुख से मुक्ति पाना होना चाहिए।
आचार्य जी ने आचार्य नागार्जुन के विचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि "अस्ति" (है) और "अस्म" (मैं हूं) के बीच का संबंध कैसे हमारे दुख को प्रभावित करता है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अगर हम अपने दुख का कारण बाहरी दुनिया में खोजते हैं, तो हम अपनी विवशता को स्वीकार कर लेते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि ज्ञान और आत्म-ज्ञान के माध्यम से हम अपने दुख को समझ सकते हैं और उसे दूर कर सकते हैं। अंत में, उन्होंने यह कहा कि हमें अपने बंधनों को पहचानना और समझना चाहिए, ताकि हम वास्तविक मुक्ति प्राप्त कर सकें।
प्रसंग:
~ सारे ग्रंथों का अध्ययन किस लिए किया जाता है, मूल बात क्या है?
~ इंसान दुख को अमर कैसे कर देता है?
~ किन दो मजबूरियों के कारण आदमी दुख पाता है?
~ अपने बंधनों को कैसे जानें?
~ अपनी मजबूरियों से कैसे लड़ा जाए?
मन के बहुतक रंग हैं, छिन छिन बदले सोय।
एक रंग में जो रहे, ऐसा बिरला कोय ॥
~ संत कबीर
स्वभाव से जो वस्तु निर्धारित नहीं है वह
दूसरों को कैसे उत्पन्न कर सकती है?
अतः दूसरों द्वारा निर्धारित सापेक्षता वाली वस्तु
दूसरों को उत्पन्न नहीं कर सकती।
How can that which is not established by own being create others?
Conditions established by others cannot create others.
~ शून्यता सप्तती - छंद 12
संगीत: मिलिंद दाते
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