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बस्तर मेला (Bastar Mela) #bastar #mela #bastarmela #jagdalpur

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बस्तर मेला (Bastar Mela) #bastar #mela #bastarmela #jagdalpur

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फसल की कटाई के बाद बस्तर अंचल में मेले और मंडईयों का सिलसिला प्रारंभ हो जाता है. यहां मड़ई को मंडई कहा जाता है. बस्तर में आयोजित होने वाले मंडई के मूल में कोई न कोई अत: कथा, संवेदना, लोक-परंपरा निहित है, यही कारण है कि इनके सामाजिक, धार्मिक व सांस्कृतिक स्वरूप में कोई बदलाव आज तक नहीं आया. । मेला शब्द मिलन शब्द से बना प्रतीत होता है.मेला शब्द में एक रोमांच है. लगता, बैठता और भरता भी है. मेला ताजा और बासी भी हो जाता है और उठ भी जाता है. गांव-परगना, अंचल की अधिष्ठात्री देवी-देवताओं की पूजा का  पर्व भी होता है.। बस्तर के किसी गांव की प्रस्तावित मंडई-मेलों की तिथी के निर्धारण में, गावं के पुजारी का निर्णय सर्वमान्य होता है. ग्राम कोटवार के द्वारा साप्ताहिक बाजार में इसकी विधिवत सार्वजनिक आंचलिक देवी-देवताओं के साथ पुजारी और सिरहा को भी विधिवत आमंत्रण भेजा जाता है. । मंडई के आयोजन के लिए ग्रामवासी अपनी हैसियत के अनुसार धनराशि, चावल-दाल इकट्ठा कर लेते है. दूरस्थ अलचों में बसने वाले ग्रामीण वर्ष में एक बार आयोजित होने वाले इस मेले में  अपने सगे संबंधियों से मिलकर उनके हाल-चाल, सुख-दुख जानने हेतु उत्सुक होते है.।