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ॐकार का परम रहस्य — प्रणव विद्या | शिव महापुराण अध्याय 17 भाग 1

Ved puran

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ॐकार का परम रहस्य — प्रणव विद्या | शिव महापुराण अध्याय 17 भाग 1

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Ved puran
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शिवमहापुराण की विद्येश्वरसंहिता के सत्रहवें अध्याय के इस प्रथम भाग में जानिए प्रणव (ॐकार) की उत्पत्ति, उसके सूक्ष्म और स्थूल स्वरूप का भेद, पंचभूत विजय की जप-साधना, तथा त्रिविध शिवयोगियों — क्रियायोगी, तपोयोगी और जपयोगी — का रहस्य। सूतजी द्वारा ऋषियों को दिया गया यह ज्ञान पंचाक्षर मन्त्र "नमः शिवाय" की महिमा को उजागर करता है। सम्पूर्ण कथा शिवमहापुराण के मूल शास्त्र पर आधारित है।