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डिजिटल दौर में लोरियों का महत्व #SahityaAkademi #RajasthaniSahitya #NindiyaRani #MaaTuNaBadalna

KAVI VANI

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डिजिटल दौर में लोरियों का महत्व #SahityaAkademi #RajasthaniSahitya #NindiyaRani #MaaTuNaBadalna

248 просмотров · 12 дней назад
KAVI VANI
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'कवि वाणी' के इस विशेष अंक में हमारे साथ जुड़ी हैं जोधपुर की वरिष्ठ साहित्यकार, शिक्षिका एवं 'निंदिया रानी' व 'माँ तू न बदलना' जैसी चर्चित कृतियों की लेखिका आदरणीया कमला सुराणा जी। इस आत्मीय बातचीत में हमने जाना: 1938 के जोधपुर की सांस्कृतिक स्मृतियाँ और जन्माष्टमी का माहौल। एक शिक्षिका से साहित्यकार बनने का प्रेरक सफर। आज के डिजिटल युग में लोरियों और पारिवारिक संस्कारों की प्रासंगिकता। महिलाओं की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था 'संभावना' के साथ उनका लंबा अनुभव। कमला जी का साहित्यिक जीवन हमें यह संदेश देता है कि उम्र कभी रचनात्मकता की सीमा नहीं बनती। यदि संवेदनशील मन और सक्रिय लेखनी हो, तो जीवन के हर पड़ाव पर साहित्य की नई रोशनी पैदा की जा सकती है।