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धर्म या मानसिक पिंजरा? अंधविश्वास और पाखंड की धज्जियां | Osho on Religion & Freedom

NITIN RATIONAL и Osho Pravah

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धर्म या मानसिक पिंजरा? अंधविश्वास और पाखंड की धज्जियां | Osho on Religion & Freedom

6 033 просмотра · 1 месяц назад
NITIN RATIONAL и Osho Pravah
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धर्म या मानसिक पिंजरा? ओशो का सबसे तीखा प्रहार | Osho Hindi Pravachan इस ऐतिहासिक और क्रांतिकारी प्रवचन में ओशो ने धर्म, शास्त्रों, पंडितों और समाज द्वारा बनाए गए मानसिक बंधनों की असलियत को बेनकाब किया है। क्या धर्म इंसान को मुक्त करने के लिए बना था या उसे एक मानसिक पिंजरे में कैद करने के लिए? ओशो ने खड़े श्री बाबा, पाखंडी संन्यासियों, थोथे पांडित्य और विवाह के सामाजिक जाल पर तीखे व्यंग्य और कहानियों के जरिए गहरा प्रहार किया है। इस वीडियो में ओशो समझाते हैं कि असली धर्म किसी भीड़ का हिस्सा बनने में नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर के दृष्टा (साक्षी भाव) को जगाने में है। 📌 इस प्रवचन के मुख्य बिंदु (Key Highlights): • पंडित और शास्त्रीयता का थोथापन • खड़े श्री बाबा और ढोंगी तपस्या का पाखंड • धर्म की आड़ में भीड़ का मनोविज्ञान • विवाह, प्रेम और स्वतंत्रता की असली समझ • शास्त्रों का पिंजरा बनाम भीतर की मुक्ति #Osho #OshoHindi #OshoPravachan #NitinRational #SpiritualAwakening #OshoSpeech #MindTrap #Freedom -------------------------------------------------- DISCLAIMER: This video is created for philosophical, educational, and critical thinking purposes. The excerpts belong to Osho's discourses, aimed at awakening human consciousness and rational inquiry. --------------------------------------------------