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इंद्रियाँ क्यों हो जाती हैं कमजोर? | जैन कर्म सिद्धांत का रहस्य जानिए ज्ञानावरणीय कर्म...

Sadhvi Dr. Sarita Ji Maharaj

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इंद्रियाँ क्यों हो जाती हैं कमजोर? | जैन कर्म सिद्धांत का रहस्य जानिए ज्ञानावरणीय कर्म...

172 просмотра · 5 дней назад
Sadhvi Dr. Sarita Ji Maharaj
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आज के महत्वपूर्ण प्रवचन में ज्ञानावरणीय कर्म के स्वरूप, उदय और प्रभाव का विस्तारपूर्वक विवेचन किया गया। इस प्रवचन में समझाया गया कि— 🔹 ज्ञानावरणीय कर्म का उदय किस प्रकार होता है? 🔹 ज्ञानावरणीय कर्म की पहचान बाहरी और आंतरिक रूप से कैसे की जाती है? 🔹 यह कर्म आत्मा के ज्ञान को किस प्रकार प्रभावित करता है? 🔹 पाँचों इंद्रियों के माध्यम से ज्ञानावरणीय कर्म का उदय किस प्रकार दिखाई देता है? 🔹 ज्ञानावरण और विज्ञानावरण में क्या अंतर है? 🔹 जीव के अंधे, बहरे, गूंगे, काने आदि विकलांग होने के पीछे कर्म सिद्धांत को कैसे समझें? 🔹 त्वचा से संबंधित समस्याओं को जैन कर्म सिद्धांत में किस कर्म के उदय से जोड़ा गया है? 🔹 ज्ञानावरणीय कर्म के प्रभाव को कम/क्षय करने के लिए हमें क्या साधना करनी चाहिए? जैन दर्शन में कर्म केवल बाहरी परिस्थितियों को ही नहीं, बल्कि आत्मा की ज्ञान-शक्ति और अनुभूति को भी प्रभावित करने वाला सिद्धांत है। इस प्रवचन के माध्यम से कर्मों की सूक्ष्म व्यवस्था को सरल रूप में समझने का प्रयास किया गया है। 🙏 प्रवचन सुनें, चिंतन करें और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ें।