जब महादेव के एक अंगूठे से टूटा रावण का घमंड! 🕉️ | शिव तांडव स्तोत्र
AI Stories Vikram
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जब महादेव के एक अंगूठे से टूटा रावण का घमंड! 🕉️ | शिव तांडव स्तोत्र
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जब लंकापति रावण का अहंकार सातवें आसमान पर पहुंच गया, तब उसने देवों के देव महादेव के पावन धाम कैलाश पर्वत को ही उखाड़ने का दुस्साहस कर डाला। परंतु जब भगवान शिव ने केवल अपने पैर का अंगूठा पर्वत पर दबाया, तो रावण की भुजाएं पर्वत के नीचे कुचल गईं।
उसी असह्य वेदना और परम पश्चाताप के क्षणों में रावण के मुख से प्रस्फुटित हुआ एक ऐसा चमत्कारी स्तुति-गान, जिसने स्वयं महादेव को द्रवित कर दिया—"शिव तांडव स्तोत्र"। जानिए रावण के अहंकार से महाभक्ति बनने की यह अमर पौराणिक गाथा।
Video Highlights:
रावण द्वारा कैलाश पर्वत उठाना और नंदी जी का श्राप
भगवान शिव द्वारा अंगूठे से पर्वत दबाना
रावण द्वारा शिव तांडव स्तोत्र की रचना (जटाटवीगलज्जल...)
महादेव का द्रवित होना और चंद्रहास खड़ग का वरदान
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