म्यरु सैंणा दिल्ली गैणु - Vandana Chauhan #garhwalisong #pahadisong #uttarakhand
Vandana Chauhan и Rishikesh Music
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म्यरु सैंणा दिल्ली गैणु - Vandana Chauhan #garhwalisong #pahadisong #uttarakhand
629 просмотров · 8 дней назад
Vandana Chauhan и Rishikesh Music
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यै मां तुमों तैं आधुनिक बीट्स अर गढ़वाली धुनौं को सबसे बढ़िया संगम सुणिण कु मिललू।
उम्मीद छ तुमों तैं यो जरूर पसंद औलू!
: Vandana Chauhan
Lyrics:
ओ हो...
ओ हो...
चाँदणी
रात मा,
तेरि याद औंदी रे...
म्यरु
सैंणा दिल्ली गैणु,
कख घौर औंदी रे...
ओ हो...
कख घौर औंदी रे...
दिल्ली
गैणु सैंणा,
म्यरि
बाट भुलि गैना?
डांडा
माथैं बैठी-बैठी,
मैं तेरि बाट जौंणा।
रैबार
तेरु औंदु नि,
फोन भी कम करणा,
तेरि याद मा रैण कटैणी,
नैण्यूँ
मा निंद नि औणा।
ओ म्यरा सैंणा...
कख घौर औंदी रे...
तेरि बाट तकि-तकि,
म्यरि
आँख्यूँ थकि गैनी रे...
बाखळी
की देहरी मा,
बैठी साँझ ढळांदी,
डांडा
पाछैं घाम छुपै,
मन तेरि याद करांदी।
नौला माथैं जांदुं जब मैं,
तेरि बात याद औंदी,
“जल्दी घौर औलुं” बोल्या थै,
उनि बात मन मा रैंदी।
पगडंडी
मा आहट होली,
लागै तू ही औंदु,
दूर सड़क मा गाड़ी रुकै,
मन कहै—तू ही ह्वंदु।
पर द्वार मा को नि औंदु,
रैणि फेर अकेली जांदी,
तेरि याद की चादर ओढ़ि,
आँख मेरी भरि औंदी।
दिल्ली
गैणु सैंणा,
म्यरि
बाट भुलि गैना?
डांडा
माथैं बैठी-बैठी,
मैं तेरि बाट जौंणा।
रैबार
तेरु औंदु नि,
फोन भी कम करणा,
तेरि याद मा रैण कटैणी,
नैण्यूँ
मा निंद नि औणा।
ओ म्यरा सैंणा...
कख घौर औंदी रे...
तेरि बाट तकि-तकि,
म्यरि
आँख्यूँ थकि गैनी रे...
दिल्ली
की भीड़ मा सैंणा,
तू कख खोई गैना?
कांठी
मा पहाड़ की माटी,
तू भी कख संजोई गैना?
यहाँ बुराँश फुलि गैना,
डांडा
रंगी गैना,
तेरु बिना ये सारा गौं,
कस सूणो भै गैना।
घुघुती
कुहुकि बोलै,
मन तैं रैबार पठांदी,
“म्यरा सैंणा घौर तैं औजा,”
मन ही मन समझांदी।
तेरि पुराणी फोटो देखि,
हँसण की कोशिश करूं,
आँख्यूँ
मा आँसू भरि जांदा,
फेर तैं याद करूं।
तू कह्यां थै—“कुछ दिन की बात छ,
फेर घौर मैं औलुं,”
दिन बीते, महीना बीत्यो,
कब तेरि बाट छौड़ुं?
मेलु लाग्यो गौं मा फेर,
सब कोई हँसदा-बोलदा,
म्यरि
आँख्यूँ बस तैं ढूंढैं,
मन तेरु नाम बोलदा।
बाखळी
मा तेरी याद छ,
चूल्हा
मा तेरी बात,
तेरि बिना ये पहाड़ भी,
लागै अधूरी रात।
ओ सैंणा...
तू दिल्ली मा कमाई करदा,
मैं यहाँ तेरि बाट जौंणा...
तू परदेशी शहर मा रैंदा,
मैं तेरि याद मा रोणा...
एक दिन तू घौर औजा,
म्यरि
आस न तोड़ि जा,
तेरि खातिर राखी छ मैंने,
मन की बात नि छोड़ि जा...
दिल्ली
गैणु सैंणा,
अब घौर लौटि औजा,
डांडा
माथैं चाँद उग्यां,
म्यरि
बाट नि भुला।
रैबार
तेरु ल्याजा,
एक बोल प्रेम को ल्याजा,
तेरि याद मा जली-जली,
म्यरि
रैण बचा जा।
ओ म्यरा सैंणा...
कख घौर औंदी रे...
तेरि बाट तकि-तकि,
म्यरि
आँख्यूँ थकि गैनी रे...
ओ हो... हो रैणा...
दिल्ली
गैणु सैंणा...
म्यरि
बाट जौंणा...
तू घौर औजा...
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