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अलख जगा रे औघड़ 🔱 Kaal Bhairav Aghor Bhajan कालभैरव Bhakti Bina

Bhakti Bina

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अलख जगा रे औघड़ 🔱 Kaal Bhairav Aghor Bhajan कालभैरव Bhakti Bina

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अलख जगा रे औघड़ 🔱 एक प्रचंड कालभैरव अघोर भजन — जहाँ भक्ति, वैराग्य, भस्म, धूनी और काशी के कोतवाल कालभैरव की रौद्र शक्ति एक साथ जागती है। “भोले तेरा नशा छाया है, रूह में दिगंबर समाया है…” यह भजन उस भक्त की यात्रा है जो संसार से हारकर कुछ माँगने नहीं, बल्कि अपने भीतर के भय, मोह और अभिमान को भैरव की धूनी में जलाने आया है। जब कुछ भी अपना नहीं बचता— तब एक नाम बचता है… भैरव। कालभैरव। 🔱 🎵 मुख्य पंक्तियाँ अलख जगा रे औघड़! धूनी जला रे औघड़! भस्म उठा रे औघड़! काशी पुकारे — भैरव जगा! भोले तेरा नशा छाया है, रूह में दिगंबर समाया है। जिस भैरव से जग डरता है— उसी भैरव को अपना पाया है। अब काल भी आए सामने— मेरे सिर पर तेरा साया है॥ 🙏 यदि यह भजन आपके भीतर तक पहुँचे, तो Bhakti Bina को Subscribe करें और comment में लिखें: “अलख निरंजन 🔱 जय कालभैरव” 🎧 बेहतर अनुभव के लिए headphones/earphones के साथ सुनें। हर हर महादेव 🔱 अलख निरंजन 🙏 जय कालभैरव 🕉️ #KaalBhairav #अलखजगारेऔघड़ #Aghor #KalBhairav #BhairavBhajan #AlakhNiranjan #Mahadev #ShivBhajan #BhaktiBina