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चोल वंश की कांस्य मूर्तियाँ व भूमि प्रकार, राजा करिकाल, पांड्य वंश एवं चालुक्य वंश की शाखाएँ | Arjun

History By Arjun

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चोल वंश की कांस्य मूर्तियाँ व भूमि प्रकार, राजा करिकाल, पांड्य वंश एवं चालुक्य वंश की शाखाएँ | Arjun

8 просмотров · 1 день назад
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इस वीडियो में अर्जुन सर द्वारा इतिहास की क्लास-31 के अंतर्गत 'चोल वंश (कांस्य मूर्तियाँ, भूमि के प्रकार व कर व्यवस्था)', प्राचीन चोल वंश के प्रतापी शासक राजा करिकाल (पुहार बंदरगाह व वेण्णी का युद्ध), 'पांड्य वंश' (मदुरै, कोरकई, नेदुनजेलियन) तथा 'चालुक्य वंश की तीनों शाखाओं' की पूरी थ्योरी को अत्यंत सरल भाषा में कवर किया गया है। यह क्लास आपकी आगामी सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ​वीडियो के प्रमुख बिंदु ​चोल वंश - कांस्य मूर्तियाँ एवं भूमि के प्रकार: ​चोल काल में कांस्य मूर्तियों का निर्माण 'लॉस्ट वैक्स तकनीक' (मोम-लोपी विधि) से किया जाता था। ​भूमि के प्रकार: ​वल्लवगै: ब्राह्मणों को दान में दी गई भूमि। ​पल्ली छन्दम: जैन मठों को दान दी गई भूमि। ​देवदान / तिरुनमत्तुक्कणी: मंदिरों को दान में दी गई भूमि। ​शालाभोग: विद्यालय के रखरखाव के लिए दी गई भूमि। ​वेल्लन वगै: गैर-किसान या गैर-ब्राह्मण स्वामियों की भूमि। ​प्रमुख कर: भूमि कर को 'कड़माई' या 'ईराई' कहा जाता था; जबरन श्रम को 'वेष्टि' तथा आयात-निर्यात कर को 'शुल्क' कहा जाता था। ​प्राचीन चोल वंश व राजा करिकाल: ​प्राचीन चोल साम्राज्य तमिलनाडु में वेल्लार और पेनार नदियों के बीच स्थित था। ​राजचिन्ह: बाघ | राजधानी: मलनूर / उरैयूर (जो कपास की खेती के लिए प्रसिद्ध थी)। ​इस वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक करिकाल (कराईकल) था, जिसने पुहार बंदरगाह का निर्माण कराया था। ​करिकाल को संगीत का ज्ञान था, उसने कृषि को प्रोत्साहन देने के लिए नहरों का निर्माण कराया और वेण्णी के युद्ध में चेर तथा पांड्य के संयुक्त राजाओं को हराया था। ​पांड्य वंश: ​सुदूर दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित, जिसकी प्रारंभिक राजधानी कोरकई (कोलची) और मुख्य राजधानी मदुरै (वैगई नदी के तट पर) थी। ​पांड्य वंश की जानकारी: पाणिनी की 'अष्टाध्यायी' और मेगास्थनीज की पुस्तक 'इंडिका' (जिसमें पांड्य समाज को मातृसत्तात्मक बताया गया है) से मिलती है। ​पांड्य साम्राज्य मोतियों के व्यापार के लिए विश्व प्रसिद्ध था। ​प्रमुख शासक: नेदियोन (समुद्र पूजा का आरंभकर्ता) तथा नेदुनजेलियन (इस वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक, जिसने शिल्प्पादिकारम के नायक कोवलन को फाँसी की सजा दी थी)। ​चालुक्य वंश (तीन मुख्य शाखाएँ): ​बादामी / वातापी के चालुक्य: कर्नाटक (मुख्य शाखा, शासनकाल: 543-757 ईस्वी, जानकारी: महाकूट अभिलेख)। ​बेंगी के चालुक्य: आंध्र प्रदेश। ​कल्याणी के चालुक्य: कर्नाटक / महाराष्ट्र क्षेत्र। ​वीडियो को समर्थन दें वीडियो को लाइक करें, अपने दोस्तों के साथ साझा करें और चैनल को सब्सक्राइब करके घंटी का निशान जरूर दबाएं ताकि हर नई क्लास की सूचना आपको सबसे पहले मिले। ​प्लेलिस्ट लिंक यहाँ अपनी प्लेलिस्ट का लिंक डालें:    • Special History,,   ​आपके प्रश्न (Your Queries) ​चोल वंश की कांस्य मूर्तियाँ और चोल प्रशासन भूमि प्रकार क्लास 31 ​प्राचीन चोल वंश राजा करिकाल और पुहार बंदरगाह ​पांड्य वंश का इतिहास मेगास्थनीज इंडिका और कोरकई ​नेदुनजेलियन और पांड्य वंश की मोतियों की प्रसिद्ध ​चालुक्य वंश की तीन शाखाएँ बादामी बेंगी कल्याणी ​दक्षिण भारत के राजवंश संगम काल थ्योरी ​प्राचीन भारत का इतिहास थ्योरी क्लास अर्जुन सर ​अर्जुन सर स्पेशल इतिहास क्लास 31 ​ ​चोल_वंश, कांस्य_मूर्तियाँ, चोल_प्रशासन, राजा_करिकाल, पुहार_बंदरगाह, वेण्णी_का_युद्ध, पांड्य_वंश, मदुरै, कोरकई, मेगास्थनीज_इंडिका, नेदुनजेलियन, चालुक्य_वंश, बादामी_चालुक्य, बेंगी_चालुक्य, कल्याणी_चालुक्य, दक्षिण_भारत_का_इतिहास, प्राचीन_भारत_का_इतिहास, इतिहास_क्लास_31, अर्जुन_सर_इतिहास, सरकारी_नौकरी_तैयारी